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मोदी के मिशन को क्यों अपना नहीं रहे व्यापारी, सता रहे हैं 5 तरह के डर 

Thu, 08 Dec 2016 09:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 08 Dec 2016 09:56 AM IST
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Why are merchant not adopting PM's mission, these five fears are here
कैशलेस - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापारियों को कैश पेमेंट की जगह डिजिटल पेमेंट अपनाने पर जोर दिया था, लेकिन लोकल व्यापारियों को ये 5 डर सताने लगे हैं।
Why are merchant not adopting PM's mission, these five fears are here
कैशलेस - फोटो : ANI

व्यापारियों के पास रोजाना छोटे शहरों या फिर कस्बों के छोटे व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। छोटे शहरों और कस्बों के व्यापारियों को ग्राहकों से कैश में पैसे मिलते हैं। इन्हीं पैसों को बड़े व्यापारियों के यहां से ऑर्डर बुक करने के लिए पेमेंट करते हैं। ऐसे में कैशलेस होने के बाद इन व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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कैशलेस

छोटे शहरों और कस्बों के व्यापारी बड़े व्यापारियों के यहां सामान ऑर्डर करते हैं। इसके लिए वह कुछ एडवांस पेमेंट करने के बाद बाकी के पैसे किस्तों में जमा करते हैं, जो कि कैश में होता है। अगर कैशलेस व्यवस्था की जाती है तो फिर इन व्यापारियों को बैंक के एक्स्ट्रा चक्कर काटने पड़ जाएंगे और उनका व्यापार भी प्रभावित होगा।

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कैशलेस - फोटो : social media

व्यापारियों के यहां काम करने वाले मजदूरों और लेबरों का भुगतान कैश में होता है। ये मजदूर फैक्ट्री से सामान लाने, ले जाने, बस स्टैंड तक पहुंचाने और या फिर ट्रांसपोर्ट तक ले जाने का काम करते हैं। इन मजदूरों को पैसे कैश में चाहिए क्योंकि कई सारे मजदूर डेली वेजेस पर काम करते हैं तो कई सारे मजूदर मासिक सैलरी पर होते हैं।

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कैशलेस

व्यापारियों के सामने दिक्कत ये भी है कि माल ढुलाई का काम रिक्शा वालों, ठेला वालों और ऑटो वालों से होता है। एक ठेले को खींचने वाला एक मजदूर और धक्का लगाने वाले 3 मजदूर होते हैं। इन मजदूरों को पैसे कैश में दिए जाते हैं साथ ही रिक्शे और ऑटो वालों को भी कैश में भुगतान किया जाता है।

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