मोदी के मिशन को क्यों अपना नहीं रहे व्यापारी, सता रहे हैं 5 तरह के डर
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व्यापारियों के पास रोजाना छोटे शहरों या फिर कस्बों के छोटे व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। छोटे शहरों और कस्बों के व्यापारियों को ग्राहकों से कैश में पैसे मिलते हैं। इन्हीं पैसों को बड़े व्यापारियों के यहां से ऑर्डर बुक करने के लिए पेमेंट करते हैं। ऐसे में कैशलेस होने के बाद इन व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
छोटे शहरों और कस्बों के व्यापारी बड़े व्यापारियों के यहां सामान ऑर्डर करते हैं। इसके लिए वह कुछ एडवांस पेमेंट करने के बाद बाकी के पैसे किस्तों में जमा करते हैं, जो कि कैश में होता है। अगर कैशलेस व्यवस्था की जाती है तो फिर इन व्यापारियों को बैंक के एक्स्ट्रा चक्कर काटने पड़ जाएंगे और उनका व्यापार भी प्रभावित होगा।
व्यापारियों के यहां काम करने वाले मजदूरों और लेबरों का भुगतान कैश में होता है। ये मजदूर फैक्ट्री से सामान लाने, ले जाने, बस स्टैंड तक पहुंचाने और या फिर ट्रांसपोर्ट तक ले जाने का काम करते हैं। इन मजदूरों को पैसे कैश में चाहिए क्योंकि कई सारे मजदूर डेली वेजेस पर काम करते हैं तो कई सारे मजूदर मासिक सैलरी पर होते हैं।
व्यापारियों के सामने दिक्कत ये भी है कि माल ढुलाई का काम रिक्शा वालों, ठेला वालों और ऑटो वालों से होता है। एक ठेले को खींचने वाला एक मजदूर और धक्का लगाने वाले 3 मजदूर होते हैं। इन मजदूरों को पैसे कैश में दिए जाते हैं साथ ही रिक्शे और ऑटो वालों को भी कैश में भुगतान किया जाता है।