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Valentines Day: इस शख्स के लिए 'भारत' मां है पहला प्यार, 4 पीढ़ियों से कर रहे हैं बेपनाह इश्क
Tue, 12 Feb 2019 02:43 PM IST
खुशबू गोयल
गोविंद परवाना, अमर उजाला, मनीमाजरा
गोविंद परवाना, अमर उजाला, मनीमाजरा
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 12 Feb 2019 02:43 PM IST
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गुरसेवक सिंह
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वैलेंटाइन डे के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं भारत मां के प्रति सेना के बहादुर जवान के प्यार की ऐसी कहानी, जो रिटायर होने के बाद भी आगे बढ़ रही है। चार पीढ़ियों से यह अटूट प्रेम निभा रहे हैं।
भारतीय सेना के कर्नल
प्रेम एक ऐसा शब्द है कि जिसके साथ हो जाए, उसके लिए इंसान अपना सब कुछ न्यौछावर कर देता है। ऐसा ही प्यार किया है मॉडर्न कांप्लेक्स में रहने वाले रिटायर्ड कर्नल गुरसेवक सिंह गुरू ने भारत मां से। मां के इस लाडले ने अपने बाद अपने बच्चों को भी भारत मां की सेवा के लिए समर्पित किया है। इनका प्यार यही तक खत्म नहीं हुआ रिटायर्ड होने के बाद भी देश की रक्षा में लगे मां के वीर जवानों को तनाव से मुक्त रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। यह तनाव मुक्त उनका फॉर्मूला जवानों को युद्ध में लड़ने से लेकर उनके पारिवारिक संबंधों को बरकरार रखने के लिए कारागार है। इसके लिए उन्होंने अलग से अपनी एक थेरेपी बनाई है। यह थेरेपी उन्होंने 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान बनाई। जब उस युद्ध में लड़ने वाले नई उम्र के वायुसेना के जवान लड़ने से घबराहट महसूस करने लगे थे।
भारतीय सेना के कर्नल
कर्नल गुरसेवक सिंह के पिता और दादा भी रॉयल इंडिया आर्मी में थे। उनके दादा कैप्टन हरभगत सिंह ने रॉयल इंडिया आर्मी की ओर से दूसरे विश्व में लड़ाई लड़ी। इसके बाद उनके पिता कैप्टन गुरमेल सिंह भी रॉयल इंडिया आर्मी में भर्ती हुए। उन्होंने देश की रक्षा के लिए 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे किए। वहीं 1969 में कर्नल गुरसेवक भी कमीशन लेकर भारतीय सेना में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद भर्ती हुए और 1971 के युद्ध में अपने पिता के साथ बार्डर तैनात रहे। उनके पिता उस समय लाहौर के फ्रंट पर तैनात थे जबकि वो खुद बंगलादेश के फ्रंट पर तैनात थे। उनके बेटे कर्नल इंदरजीत सिंह इन दिनों फिरोजपुर में कंपनी कमांडर में हैं। इसके अलावा उनके दामाद कर्नल उपेन्द्र पाल सिंह सिद्धू लखनऊ में तैनात हैं।
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भारतीय सेना के कर्नल
कारगिल युद्ध के दौरान एक समय ऐसा भी आया कि जब कर्नल गुरसेवक ने वायुसेना के जवानों को प्रेरित किया। इस दौरान पहली बार युद्ध लड़ने वाले जवान युद्ध लड़ने से पहले घबराहट महसूस कर रहे थे। इसके बाद कर्नल ने मां के इन लाडलों को तनाव से मुक्त करने के लिए थेरेपी तैयार की। यह थेरेपी इतनी कारगर सिद्ध हुई कि दुश्मनों को धूल चटाने के लिए जवानों का खून उबाल मारने लगा। इस थेरेपी से कर्नल गुरसेवक अभी तक लगभग दो लाख इंडियन आर्मी के जवानों और अधिकारियों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। वह अनुभव से चंडीगढ़ पुलिस, कारपोरेट और अन्य कई संस्था के लोगों को तनाव से मुक्त रहने का तरीका बताते हैं। इस पर कर्नल दो किताबें भी लिख चुके हैं।
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भारतीय सेना
इस बारे में विस्तार से बताते हुए कर्नल गुरसेवक सिंह ने कहा कि 1999 कारगिल के दौरान उनकी पोस्टिंग श्रीनगर से तीस किलोमीटर पीछे आवंतीपूर एयरबेस पर थी। यहां उनका काम आर्मी और एयरफोर्स में तालमेल बनाना था। हवाई हमले से पहले फाइटर जेट के पायलट को पूरी योजना और दुश्मन के ठिकानों की जानकारी देना होता था। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि सभी पायलट युवा और उन्हें अभी तक युद्ध का कोई अनुभव नही था। इसलिए उसमें से कुछ पायलट नर्वस भी हो रहे थे। उनकी भावना को समझते हुए उन्होंने सभी पायलट को तनाव से मुक्त करने के लिए टिप्स दिए। उन्होंने बताया इनसे सभी पायलट का तनाव लगभग समाप्त हो गया और उनमें युद्ध लड़ने का पूरा जोश भर गया।