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Valentine's Day: मिलिए पाकिस्तान के 42 बच्चों की दादी अम्मा से, ये इंडियन हैं

Wed, 14 Feb 2018 07:19 PM IST
रमेश शुक्ला 'सफर'/अमर उजाला, राजासांसी (अमृतसर)
रमेश शुक्ला 'सफर'/अमर उजाला, राजासांसी (अमृतसर) Updated Wed, 14 Feb 2018 07:19 PM IST
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हरभजन कौर
वैलेंटाइन डे के मौके पर हम आपको मिलवा रहे हैं, पाकिस्तान में रह रहे 42 बच्चों की दादी अम्मा से। ये भारतीय हैं और इनकी स्टोरी दिल छू लेने वाली है।
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valentines day
यह कहानी नही हकीकत है और अगर किसी निर्देशक की नजर में आ जाए तो सुपर डुपर हिट फिल्म बन सकती है। कहानी ऐसी सिख लड़की की है जो 1946 में ब्याह कर अमृतसर से लाहौर गई, लेकिन 1947 भारत-पाकिस्तान बंटवारे में पाकिस्तान से भारत लौटते समय उसके ससुराल वाले दंगे की भेंट चढ़ गए। एक मुस्लिम ने उसे बचा लिया और हालात ऐसे बने कि उसने धर्म परिवर्तन करके उससे शादी कर ली।
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Valentines Day
कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आया, जब 1962 में पाकिस्तान से अपने मायके (अमृतसर) लौटी। उसके बाद मायके वालों ने उसे दोबारा पाकिस्तान नही जाने दिया और वहां उसकी 6 संतानें छूट गई। अब वह लड़की 87 साल की हो चुकी है और संतानों से मिलने के लिए कराची पहुंची है। वहीं, पाकिस्तान में अब 5 बच्चे रह गए हैं। एक की मौत हो गई हैं। सभी 6 बच्चों से उसके 42 पोते-पोतियों हैं और सभी उसे दादी अम्मा कहते हैं।
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इनका नाम है, हरभजन कौर जो भारत-पाकिस्तान बंटवारे में खुद भी बंट गई थी। 1946 में लाहौर में शादी हुई थी। बंटवारे के आतंक में भारत लौटते समय उसके ससुराल वालों दंगे के भेंट चढ़ गए। हरभजन की जान कराची के अफजल खां ने बचाई। हरभजन को जब किसी सूरत में भारत नही भेज सका तो उसका धर्म परिवर्तन करके शहनाज बेगम नाम रखते हुए निकाह कबूल करवा लिया। इसी दौरान छह संतान हुई। सब कुछ अच्छा चल रहा था शहनाज बेगम की जिंदगी में।
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1962 में नाटकीय मोड़ तब आया जब शहनाज बेगम भारत-पाकिस्तान के बीच सरल वीजा नीति के तहत अमृतसर अपने पैतृक गांव राजासांसी पहुंची। हरभजन कौर से शहनाज बेगम बनने की सारी कहानी परिवार वालों ने सुन तो ली लेकिन उसे उसे पाकिस्तान जाने नही दिया। अमृतसर में उसकी दोबारा शादी गुरबचन सिंह से कर दी गई। गुरबचन सिंह से हरभजन कौर ने एक बेटे को जन्म दिया। बेटे का नाम रौमी रखा। रौमी धीरे-धीरे बड़ा होने लगा।
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