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शहीद सुखदेव के जीवन से जुड़ी 9 अनसुनी बातें

Tue, 16 May 2017 09:12 AM IST
amarujala.com- presented by: खुशबू गोयल
amarujala.com- presented by: खुशबू गोयल Updated Tue, 16 May 2017 09:12 AM IST
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untold things about shaheed sukhdev thapar personal life on his birth anniversary
शहीद सुखदेव
24 साल की उम्र में देश पर कुर्बान होने वाले शहीद सुखदेव के जन्मदिवस के मौके पर हम आपको बता रहे हैं, उनके निजी जीवन से जुड़ी 10 अनसुनी बातें।
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भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव
कुशल रणनीतिकार
'साइमन कमीशन' के भारत आने पर हर ओर उसका तीव्र विरोध हुआ। पंजाब में इसका नेतृत्व लाला लाजपत राय कर रहे थे। विरोध करने पर हुए लाठीचार्ज में जब लाला जी का देहांत हो गया तो सुखदेव और भगत सिंह ने ही बदला लेने का फैसला किया। इस सारी योजना के सूत्रधार सुखदेव ही थे। सेंट्रल एसेंबली के सभागार में बम और पर्चे फेंकने और फिर गिरफ़्तारी और अन्य योजनाओं को भले ही भगत सिंह समेत दूसरे क्रांतिकारियों ने अंजाम दिया हो, लेकिन कहते हैं कि सुखदेव इस युवा क्रांतिकारी आंदोलन की नींव और रीढ़ थे।
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सुखदेव
जिद्दी व सनकी स्वभाव के थे
सुखदेव बचपन से ही जिद्दी व सनकी स्वभाव के थे। उन्हें पढ़ने लिखने में कोई विशेष रुचि नहीं थी। अगर कुछ पढ़ लिया तो ठीक ना पढ़ा तो ठीक लेकिन वह बहुत गहरा सोचते थे। ये बहुत देर तक किसी एकांत जगह पर बैठ जाते और न जाने किस चीज के बारे में सोचते रहते। ये अक्सर चुप रहते और अपने आप में खोये रहते। इनका स्वभाव ऐसा था कि ये दूसरे से सीखने में कम विश्वास करते थे, लेकिन इनके स्वभाव में सनकीपन कुछ ज्यादा ही था। इन्हें जब किसी काम को करने की सनक होती तो यह उसे हर हाल में कर गुजरते थे।

 
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शहीद सुखदेव
स्वंय ही जांचते कि कहां तक सही है
यह सुखदेव के स्वभाव में था कि जब भी कोई इन्हें सलाह देता या ये स्वंय किसी नये प्रयोग या सलाह के बारे में पढ़ते तो पहले उसे स्वंय ही जाँचते कि यह कहाँ तक सही है। उनके जीवन की एक घटना इस तथ्य को प्रमाणित भी करती है, एक बार इन्होंने किसी किताब से पढ़ा कि यदि झगड़े या मारपीट के समय अपने से बहुत अधिक बलवान किसी व्यक्ति से मुकाबला हो तो अपनी रक्षा के साथ ही प्रतिद्वंदी को हराने के लिये उसकी नाक पर जोर से घूसा मार देना चाहिये।
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शहीद सुखदेव
भगत सिंह को फरार करने में सहायता
लाला लाजपत राय पर लाठी से हमला करने वाले जे. पी. साण्डर्स को गोली मारते समय भगत सिंह को एक दो पुलिसकर्मियों ने देख लिया था, इस कारण उन्हें लाहौर से फरार करने में बड़ी परेशानी हो रही थी। क्योंकि इस बात का भय लगातार बना हुआ था कि एक छोटी सी गलती होने पर भगत सिंह को गिरफ्तार किया जा सकता है। इस समय में सुखदेव ने भगत सिंह को लाहौर से बाहर भेजने में सहायता की। भगत सिंह के भेष को बदलने के लिये उनके बाल काट दिये और उनकी दाड़ी भी साफ करा दी गयी।
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