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खुदाई में जमीन से निकली जलधारा कहीं सरस्वती की तो नहीं?

Fri, 18 Dec 2015 09:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Fri, 18 Dec 2015 09:59 AM IST
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खुदाई में जमीन से निकली जलधारा कहीं सरस्वती की तो नहीं?

under land found water may be saraswati river water, pictures

सरस्वती की धारा को खोजने के वर्षों से चल रहे भगीरथ प्रयास सफल होते दिख रहे हैं। यमुनानगर में जमीन से 10 फुट नीच जलधारा ढूंढ़ ली गई है। प्रशासन का दावा है कि ये जलधारा सरस्वती नदी की है। तस्‍वीरों में देखिए जलधारा।

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हरियाणा की धरा से लुप्त सरस्वती नदी की धारा फूट पड़ी है। इसकी पुष्टि जिला प्रशासन ने भी कर दी है। दरअसल हरियाणा के ‌यमुनानगर में आदिबद्री से पांच किलोमीटर दूर मुगलवाली गांव में सरस्वती के बहाव क्षेत्र में खुदाई के दौरान नदी का जल निकल आया है। आठ से दस फुट की खुदाई में जगह-जगह जल की धारा फूट रही है। प्रशासनिक अफसरों का दावा है यहीं सरस्वती नदी बहा करती थी और यह जल सरस्वती का ही है।

खुदाई में जमीन से निकली जलधारा कहीं सरस्वती की तो नहीं?

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इतनी कम गहराई पर नीली बजरी, चमकदार रेत और खनिज के मिश्रण वाला यह पानी हुबहू नदियों में बहने वाले पानी की तरह लग रहा है। आला अधिकारियों ने इसकी पुष्टि के लिए यहां एक-एक करके करीब 10 गड्ढे खोदे और हर जगह समान अनुपात में पानी फूट पड़ा। मुगलवाली पहुंचे डीसी डॉ. एसएस फुलिया और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी जमीन से निकले जल को देखकर रोमांचित हो उठे।

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इसके बाद डीसी, एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने भी खुद कस्सी से खुदाई कर इसकी जांच की। डीसी ने कहा कि सरस्वती नदी का जिक्र पुराणों में मिलता है और राजस्व रिकार्ड में भी इसका अस्तित्व रहा है। आज यह नदी हकीकत में धरती पर अवतरित होती दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल को जिला प्रशासन की ओर से इस नदी की खुदाई शुरू करवाई गई थी। कुछ लोगों ने इस घटना को मिथ माना था।

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सरस्वती शोध संस्थान के प्रमुख दर्शन लाल जैन ने इस पर कड़ी मेहनत की और आज यह भ्रांति सच्चाई में बदल गई है। डीसी ने बताया कि आदिबद्री को सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माना गया था और यहां से पांच किलोमीटर दूर गांव रूलाहेड़ी में इस नदी की खुदाई शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि गांव छलौर में एक बड़ा जलाशय बनाया जाएगा, जिसमें पहाड़ों पर होने वाली बरसात और सोम नदी के पानी को इकट्ठा कर सरस्वती नदी को एक बड़ी नदी के रूप में प्रवाहित किया जाएगा।

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