अगर आप बहुत कम या बहुत ज्यादा नींद लेते हैं तो जान जा सकती है। अगर हकीम वैद्य के पास जाते हैं तो तुरंत संभल जाएं, वरना जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।
बात हो रही है ब्रेन स्ट्रोक की, जो हार्ट अटैक की तरह ही है। कई मायनों में उससे भी खतरनाक है, लेकिन हमारे देश में आज भी ब्रेन स्ट्रोक होने पर लोग मरीज को लेकर हकीम की तरफ भागते हैं, जिससे उसकी समस्या कम होने की बजाए और बढ़ जाती है। ये कहना है पीजीआई स्ट्रोक प्रोग्राम के इंचार्ज डॉ धीरज खुराना का।
पत्रकारों से बात करते हुए डॉ धीरज ने बताया कि हमारे देश में हार्ट अटैक, कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियों को जितनी गंभीरता से लिया जाता है, स्ट्रोक को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता। जबकि अब उम्रदराज लोग ही नहीं युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं। उन्होने बताया कि हार्ट अटैक आने पर मरीज दवाईयां लेकर कुछ दिन बाद किसी तरह नॉर्मल हो जाता है लेकिन स्ट्रोक में ऐसा नहीं है।
डॉ धीरज ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक बन टाइमर नहीं है। इससे बाहर निकलने में मरीज को काफी समय लग जाता है। साथ ही परिवार के सदस्य भी प्रभावित होते है। डॉ धीरज ने बताया कि देश में रोजाना औसतन 4500 लोगों को स्ट्रोक होता है। इसके अलावा स्ट्रोक से हर मिनट एक व्यक्ति की मौत हो रही है। इसलिए जरूरी है कि इसके लक्षणों को पहचानकर तुरंत ही इसका उपचार शुरू कर दिया जाए।
डॉ धीरज ने बताया कि बहुत ज्यादा सोना या कम सोना हमारी सेहत के लिए खतरनाक है ये तो सभी जानते हैं। लेकिन ज्यादा या कम नींद लेने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। आमतौर पर स्वस्थ जीवन के लिए दिन में सात से आठ घंटे की नींद जरूरी बताई गई है। जब हम इससे कम या ज्यादा नींद लेते हैं तो खून की सप्लाई हमारे दिमाग में नहीं हो पाती। नींद में ही ब्रेन स्ट्रोक का खतरा पैदा हो जाता है।