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...तो अफवाह है प्लास्टिक के चावल की खबर, एक्सपर्ट्स बोले- इसलिए उछलता है गोला

Fri, 08 Dec 2017 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 08 Dec 2017 09:20 AM IST
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TESTS HAVE SHOWN 'FAKE RICE' IS NOT PLASTIC
Plastic Rice test - फोटो : File Photo
सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हैं जिनमें चावल के गोले बनाकर उन्हे जमीन पर पटका जा रहा है और उसे प्लास्टिक का बताया जा रहा है। अब इसकी सच्चाई देखिए
TESTS HAVE SHOWN 'FAKE RICE' IS NOT PLASTIC
'FAKE RICE' IS NOT PLASTIC
24 को वायरल हुआ था वीडियो
दरअसल, चंडीगढ़ में बीते 24 नवंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दिखाया गया है कि एक युवक सेक्टर 16 हास्पिटल की कैंटीन में जाता है और वहां से खाने की एक प्लेट लेता है। प्लेट में दाल, चावल और रोटी है। चावल को उठाकर मुट्ठी में भरता है और उसे रोलकर गेंदनुमा गोला बनाता है। युवक उस गोले को मेज पर पटकता है तो गोला जमीन पर उछलता है। युवक का दावा है कि चावल में प्लास्टिक है, इसलिए वह उछलता है। वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद जीएमएसएच 16 और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी हरकत में आए और कैंटीन में बिक रहे चावलों के सैंपल भरे।
TESTS HAVE SHOWN 'FAKE RICE' IS NOT PLASTIC
'FAKE RICE' IS NOT PLASTIC
बस अड्डे की कैंटीन की भी आई थी शिकायत
यह वीडियो वायरल होने से पहले भी इसी तरह से 19 नवंबर को शिकायत आई थी कि बस अड्डे के पास की एक कैंटीन में प्लास्टिक के चावल बिक रहे हैं। उस दौरान शिकायत करने वाले युवक ने हंगामा भी किया था। बाद में फूड सेफ्टी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच के लिए सैंपल भरे। सैंपल फूड लैब में भेजे गए, मगर वहां भी कुछ नहीं मिला था। दूसरों प्रदेशों से भी ऐसी खबरें आ चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी भी सैंपल में प्लास्टिक की बात सामने नहीं आई है।
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इसलिए उछलता है चावल का गोला
अधिकारियों का कहना है कि आजकल चावल कुकर में बनाए जाते हैं। इससे चावलों में थोड़ा बहुत पानी रहता है। चावलों में स्टार्च भी होता है। पानी और स्टार्च की मदद से चावल के रोल बनाए जा सकते हैं, क्योंकि स्टार्च चावल को बांध देता है। उसे आसानी से जमीन पर पटका जा सकता और वह उछलेगा भी। प्लास्टिक के चावलों का सवाल ही नहीं बनता। सामान्य तौर पर 40-50 रुपये किलो बिकने वाले चावल को अगर प्लास्टिक का बनाया जाए तो एक किलो चावल की लागत करीब 200 रुपये बैठेगी। ऐसे में कोई क्यों चार गुना घाटा सहकर नकली चावल बेचेगा। 
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'FAKE RICE' IS NOT PLASTIC
तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में भी प्लास्टिक के चावल बिकने की सोेशल मीडिया में अफवाह फैलाई गई थी। बैंगलूरू स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस ने इस बारे में कुछ सैंपल टेस्ट किए थे, मगर टेस्ट में कुछ भी नहीं निकला। सभी दावे झूठे निकले। एग्रीकल्चरल साइंस यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने पाया कि जिन चावलों को प्लास्टिक का बताया जा रहा है उनमें प्लास्टिक का कोई तत्व नहीं है, बल्कि वे खराब क्वालिटी के हैं। नकली या प्लास्टिक के चावल बनाना संभव नहीं है।
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