घाटी में सेना को फ्री हैंड देने के बाद से ही पाक समर्थित आतंकी संगठनों की बेचैनी बढ़ी है। इसी वजह से इन दिनों घाटी में आतंकियों के लिए घुसपैठ थोड़ी मुश्किल हो गई है।
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पिछले करीबन एक साल से घाटी में सैन्य अभियानों की तेजी के बाद से आतंकी संगठनों में जबरदस्त खलबली का माहौल है। ये संगठन आतंकियों को पाक अधिकृत कश्मीर में ट्रेनिंग दिलवाकर ट्रेंड आतंकियों को बड़ी संख्या में एलओसी पार घाटी को दहलाने लिए भेजते हैं। लेकिन पिछले एक साल से संगठनों के लिए ऐसा करना आसान नहीं रहा।
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इसलिए इन संगठनों ने अब घाटी के पहाड़ी जंगलों में ही आतंकी ट्रेनिंग शुरू करवा दी है। ये संगठन घाटी के स्थानीय किशोरों व युवाओं को टारगेट पर रखते हैं, उनके जहन में जेहाद का जहर भरते हैं और फिर उन्हें आतंकी ट्रेनिंग के लिए तैयार करते हैं। पहले घाटी के इन किशोरों व युवाओं को संगठनों द्वारा आतंकी ट्रेनिंग केलिए एलओसी पार आतंकी कैंपों में ले जाया जाता था।
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चूंकि अब सरहद पार करना मुश्किल हो चुका है, लिहाजा इन आतंकी संगठनों ने घाटी के गुमराह किए किशोरों व युवाओं के लिए यहीं पहाड़ी जंगलों में ट्रेनिंग कैंपों का इंतजाम कर दिया है। सेना की खुफिया एजेंसियां भी लगातार घाटी में चल रहे इन आतंकी कैंपों पर काम कर रही है। घाटी में कई साल गुजार चुके सेना के रिटायर्ड एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी बताया कि अब घाटी में ही स्थानीय आतंकी कैंप लगाए जा रहे हैं।
नाम नहीं छापने का शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि हर साल सितंबर और अक्तूबर में सबसे ज्यादा घुसपैठ होती थी। नवंबर में बर्फबारी से पहले ही हथियारों समेत आतंकी एलओसी पार से घाटी में घुस जाते हैं, लेकिन इस साल सेना के जबरदस्त एक्शन मोड की वजह से इन दोनों महीनों में घाटी से घुसपैठ अपेक्षाकृत बहुत कम रही। उल्लेखनीय है कि एक्शन में आई सेना इस साल अभी तक घाटी में करीबन 169 आतंकी मार चुकी है और अपने भी लगभग 61 जवान शहीद हो चुके हैं।