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मौत खुद बताएगी, जिंदगी क्यों हारीं?: रोहतक में 5000 मौतों की होगी पड़ताल, आठ माह होगा मौखिक शव-परीक्षण सर्वे
Wed, 07 Oct 2026 09:45 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 07 Oct 2026 09:45 AM IST
सार
रोहतक में पांच हजार मौतों की पड़ताल होगी। एम्स और स्वास्थ्य विभाग मौखिक शव-परीक्षण सर्वे करेंगे। आठ महीने वर्बल ऑटोप्सी सर्वे चलेगा। मौतों के आंकड़ों से स्वास्थ्य योजनाएं तय होंगी।
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rohtak 5000 deaths survey
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
रोहतक में अब करीब 5 हजार मौतों के पीछे की वजह पता की जाएगी। इसके लिए आठ महीने का विशेष सर्वे शुरू होगा। इसमें मृतकों के परिजनों से बातचीत कर मौत से पहले दिखे लक्षण, बीमारी, इलाज और परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जाएगी। बाद में मेडिकल ऑफिसर इन जानकारियों की समीक्षा कर मृत्यु का संभावित कारण तय करेंगे।
यह आईसीएमआर के वित्तपोषण से चलने वाली मौखिक शव-परीक्षण (वर्बल ऑटोप्सी) परियोजना है। इसे एम्स, नई दिल्ली के नेतृत्व में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लागू किया जाएगा। इसके लिए रोहतक को पायलट जिला चुना गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि परियोजना करीब आठ महीने चलेगी। इस दौरान लगभग 5 हजार मौतों को सर्वे में शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के नामित कर्मचारी पहले पात्र मौतों की पहचान करेंगे। इसके बाद कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर मृतकों के परिजनों से बातचीत कर जरूरी जानकारी दर्ज करेंगे।
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यह आईसीएमआर के वित्तपोषण से चलने वाली मौखिक शव-परीक्षण (वर्बल ऑटोप्सी) परियोजना है। इसे एम्स, नई दिल्ली के नेतृत्व में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लागू किया जाएगा। इसके लिए रोहतक को पायलट जिला चुना गया है।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि परियोजना करीब आठ महीने चलेगी। इस दौरान लगभग 5 हजार मौतों को सर्वे में शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के नामित कर्मचारी पहले पात्र मौतों की पहचान करेंगे। इसके बाद कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर मृतकों के परिजनों से बातचीत कर जरूरी जानकारी दर्ज करेंगे।
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एप में रिकॉर्ड होगी पूरी जानकारी
परिजनों से होने वाली बातचीत एम्स की ओर से उपलब्ध कराए गए मोबाइल एप में दर्ज की जाएगी। स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। बातचीत में मौत से पहले की बीमारी, लक्षण, इलाज और अन्य परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद मेडिकल ऑफिसर इस जानकारी की समीक्षा कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मौत का संभावित कारण तय करेंगे।
परिजनों से होने वाली बातचीत एम्स की ओर से उपलब्ध कराए गए मोबाइल एप में दर्ज की जाएगी। स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। बातचीत में मौत से पहले की बीमारी, लक्षण, इलाज और अन्य परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद मेडिकल ऑफिसर इस जानकारी की समीक्षा कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मौत का संभावित कारण तय करेंगे।
मौतों के आंकड़ों से तय होंगी स्वास्थ्य योजनाएं
सर्वे से यह पता चल सकेगा कि रोहतक में मौतें किन कारणों और परिस्थितियों में अधिक हो रही हैं। इससे जिले में मृत्यु के पैटर्न की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी। इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग बीमारियों की रोकथाम और इलाज से जुड़ी योजनाओं की प्राथमिकताएं तय कर सकेगा।
सर्वे से यह पता चल सकेगा कि रोहतक में मौतें किन कारणों और परिस्थितियों में अधिक हो रही हैं। इससे जिले में मृत्यु के पैटर्न की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी। इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग बीमारियों की रोकथाम और इलाज से जुड़ी योजनाओं की प्राथमिकताएं तय कर सकेगा।
पूरी वर्बल ऑटोप्सी करने वाले कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को 100 रुपये और मृत्यु का कारण तय करने वाले मेडिकल ऑफिसर को भी 100 रुपये मानदेय दिया जाएगा।