तनाव भरे माहौल के बीच हरियाणा में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय के आंदोलन का पहला दिन रविवार को शांतिपूर्ण रहा। हरियाणा पुलिस की ओर से चंडीगढ़ में स्थापित विशेष कंट्रोल रूम में शाम छह बजे तक किसी भी स्थान से कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं पहुंची। राज्य के डीजीपी केपी सिंह और एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) मोहम्मद अकील दिन भर कंट्रोल रूम में उपस्थित रहे।
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जाट आंदोलन के दौरान हिसार के मय्यर में आंदोलन की रूपरेखा बनाते जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक।
- फोटो : amar ujala
एडीजीपी ने रविवार को आंदोलन शांतिपूर्ण रहने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में पुलिस को मुस्तैद किया गया था और राज्य पुलिस की मदद के लिए केंद्र से मंगाए गए सुरक्षा बलों की टुकड़ियां भी पूरे प्रदेश में तैनात रहीं। बताया कि धरना स्थलों पर कड़ी चौकसी बरती जा रही थी। इसके अलावा राज्य की सड़कों और रेल मार्गों को सुचारु रखने के लिए भी मजबूत प्रबंध किए गए थे।
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जाट आंदोलन: पैरामिलिट्री फोर्स तैनात
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पुलिस के विशेष कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के आठ जिलों- पंचकूला, गुड़गांव, फरीदाबाद, यमुनानगर, सिरसा, करनाल, नारनौल और मेवात में जाट आंदोलन पूरी तरह बेअसर रहा। इन जिलों में धरना-प्रदर्शन की भी कोई खबर नहीं है। दूसरी ओर, अंबाला के गांव हुसैनी में करीब 15 लोगों ने आरक्षण की मांग को लेकर धरना दिया।
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जाट आंदोलन: पैरामिलिट्री फोर्स तैनात
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कुरुक्षेत्र के लाडवा में गांव जैनपुर में करीब सौ लोगों ने दिनभर धरना दिया। जबकि कैथल में धरना दे रहे लोग शाम सवा चार बजे अपने घर लौट गए। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, हिसार के नैयड़ स्टेडियम में केवल आठ लोग धरने पर डटे रहे। वहीं जींद के जांझ में करीब 80 लोगों ने धरना दिया। भिवानी के दादरी कस्बे में करीब 40 लोगों ने आरक्षण की मांग लेकर धरना दिया।
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जाट आंदोलन
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रोहतक के जासिया में 400 लोग धरना स्थल पर शाम तक डटे रहे। वहीं सोनीपत के मिनी सचिवालय पार्क में भी 200 लोगों ने धरना दिया। पानीपत के मतलौढा में धरना स्थल पर करीब 30 लोग नजर आए, जबकि रेवाड़ी के प्रेमपुरा में भी करीब 35 लोगों की उपस्थिति पुलिस को नजर आई। फतेहाबाद के धानी गोपाल में करीब 55 लोगों ने धरना दिया।