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टीचर दंपती ने खोला अनोखा देसी और अंग्रेजी किताबों का 'ठेका', आएं और ऐसे लगाएं ज्ञान का गोता

Wed, 31 Jul 2019 12:57 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खन्ना (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खन्ना (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 31 Jul 2019 12:57 AM IST
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Teacher Couple Started a Unique Liberary named Theka Kitab in Ludhiana
- फोटो : अमर उजाला

ठेका का नाम आते ही लोगों के मन में शराब का चित्र उभर आता है। लेकिन आपको हम एक खास ठेका के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में पढ़कर आप भी कहेंगे भाई वाह...

Teacher Couple Started a Unique Liberary named Theka Kitab in Ludhiana
पुस्तकालय खोलने वाले टीचर दंपती - फोटो : अमर उजाला

पंजाब में एक जगह है खन्ना। यहां के गांव जरगड़ी में एक ऐसा ठेका खुला है जिसकी चारों तरफ चर्चा है। लोग भगवान से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि ऐसे ठेके पंजाब के हर गांव में खुलने चाहिए। यह ठेका है किताबों का, जहां पंजाबी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं की किताबें मिलती हैं। इसके साथ ही तर्कशीलता, कहानियां, उपन्यास और जीवन की सीख देने वाली किताबें भी उपलब्ध हैं। यह ठेका गांव में रहने वाले इंग्लिश के टीचर दर्शन दीप सिंह ने अपने फार्म हाउस पर खोला है। इस ठेके से कोई भी फ्री में हर तरह की किताब ले सकता है और पढ़ने के बाद किताब लौटा दी जाती है। करीब एक साल पहले खोले गए इस ठेके से आसपास के गांव ही नहीं शहर के कुछ लोग भी फायदा ले रहे हैं।

Teacher Couple Started a Unique Liberary named Theka Kitab in Ludhiana
- फोटो : अमर उजाला

फार्म हाउस के एक कमरे को लाइब्रेरी का रूप देकर इसके बाहर 'गवर्नमेंट से मंजूरशुदा देसी व अंग्रेजी ठेका' लिखा गया है। यह इसलिए लिखा गया कि शराब के आदी लोगों को सबक देकर उन्हें इस नशे से मुक्त कर दिया जाए। 

रद्दी में बेच रहे थे किताबें तो आया आइडिया  
दर्शनदीप सिंह गिल अक्सर साल भर घर में पढ़ी जाने वाली किताबों को रद्दी में बेच देते थे। एक दिन उन्होंने रद्दी बेचने के लिए कबाड़ी को फोन करके बुलाया तो गांव के प्राइमरी स्कूल में ही टीचर उनकी पत्नी रविंदर कौर ने रोक दिया। पत्नी ने आइडिया दिया को क्यों न वे किताबों को बेचने की बजाय किसी को पढ़ने के लिए दें। फिर दोनों ने प्लानिंग की, फार्म हाउस पर लाइब्रेरी बनाकर गांव को नई देन देते हैं। 

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Teacher Couple Started a Unique Liberary named Theka Kitab in Ludhiana
- फोटो : अमर उजाला

बेटी के जन्म पर मिठाई नहीं, बांटी थीं किताबें  
दर्शनदीप सिंह गिल को गांव में बुक्स लवर के तौर पर जाना जाता है। वर्ष 2015 में उनके घर बेटी किस्मतजोत कौर ने जन्म लिया तो उन्होंने पहले ही सभी को बोल दिया था कि जो भी बेटी का मुंह देखने आएगा उसे मिठाई नहीं, जीवन की सीख देने वाली चार किताबों का सैट दिया जाएगा। हुआ भी ऐसे ही, परिवार की तरफ से करीब 500 रिश्तेदारों को किताबें बांटी गईं। 

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Teacher Couple Started a Unique Liberary named Theka Kitab in Ludhiana
Khanna - फोटो : अमर उजाला

पूरा परिवार है पढ़ने का शौकीन
दर्शनदीप का पूरा परिवार पढ़ने का शौकीन है। दादा मुखत्यार सिंह पटवारी थे और किताबें पढ़ने के साथ-साथ लिखने का भी शौक रखते थे। पिता रणधीर सिंह गिल बिजली महकमे से रिटायर हैं। माता हरिंदर कौर गांव के स्कूल में इंचार्ज रह चुकी हैं। अब पत्नी गांव के स्कूल में टीचर है और वह खुद गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर स्कूल में इंग्लिश टीचर हैं। 

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