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रविंदर बिश्नोई, जिन्होंने साइकिल से नापा डाला आधा देश, घूमे 11 राज्य और तीन केंद्रशासित प्रदेश
Wed, 04 Mar 2020 02:28 PM IST
खुशबू गोयल
कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 04 Mar 2020 02:28 PM IST
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रविंदर बिश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
जिंदगी एक सफर है..और सफर में भाग-दौड़ नहीं होती। यह मानना है पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में अंग्रेजी विषय के स्कॉलर रविंदर बिश्नोई का। रविंदर जून 2019 से साइकिल से ही देश को नापने में जुटे हैं। वे साइकिल से अब तक दस हजार किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं।
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रविंदर बिश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर से लेकर दक्षिण के 11 राज्य 3 केंद्र शासित प्रदेश का सफर साइकिल से ही तय किया। हिसार के गांव लांधरी के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रविंदर का कहना है कि उनके परिजनों को तो ट्रैवलिंग का कांसेप्ट समझ ही नहीं आया। वो फोन करके सिर्फ सेहत के बारे में पूछते हैं। खाना खाया या नहीं जैसे सवाल ही पूछते हैं। रविंदर ने अपनी साइकिल के आगे ‘सेव एन्वायरमेंट’ का बोर्ड भी लगाया हुआ है।
रविंदर बिश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
इन राज्यों का सफर साइकिल से किया
रविंदर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, दमन-द्वीव, गोआ, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुंचैरी के लगभग 70 से ज्यादा शहरों का सफर साइकिल से तय कर चुके हैं। उनका कहना है कि वह पूरे भारत का सफर साइकिल से तय करना चाहते हैं। अभी तक वह लगभग 10 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर साइकिल से तय कर चुके हैं।
रविंदर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, दमन-द्वीव, गोआ, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुंचैरी के लगभग 70 से ज्यादा शहरों का सफर साइकिल से तय कर चुके हैं। उनका कहना है कि वह पूरे भारत का सफर साइकिल से तय करना चाहते हैं। अभी तक वह लगभग 10 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर साइकिल से तय कर चुके हैं।
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रविंदर बिश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
पहली साइकिल ट्रिप कसौल से लेह
रविंदर ने बताया कि जून, 2017 को उन्होंने दिल्ली से साइकिल खरीदी। इसके बाद वे बस से कसौल गए। वहां से उन्होंने अपनी पहली साइकिल यात्रा शुरू की। वे साइकिल से लेह गए। इस साइकिल यात्रा ने उनकी जिंदगी बदल दी। इस यात्रा ने उन्हें जो अनुभव दिए, वे शायद ही जिंदगी में कभी मिले। साइकिल से उन जगहों पर जानने का मौका मिला, जहां बस से या दूसरे वाहन से जाना मुश्किल होता था। उसके बाद वे साइकिल से ही सफर कर रहे हैं।
रविंदर ने बताया कि जून, 2017 को उन्होंने दिल्ली से साइकिल खरीदी। इसके बाद वे बस से कसौल गए। वहां से उन्होंने अपनी पहली साइकिल यात्रा शुरू की। वे साइकिल से लेह गए। इस साइकिल यात्रा ने उनकी जिंदगी बदल दी। इस यात्रा ने उन्हें जो अनुभव दिए, वे शायद ही जिंदगी में कभी मिले। साइकिल से उन जगहों पर जानने का मौका मिला, जहां बस से या दूसरे वाहन से जाना मुश्किल होता था। उसके बाद वे साइकिल से ही सफर कर रहे हैं।
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रविंदर बिश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
साइकिल है ट्रैवल फ्रैंडली
रविंदर का कहना है कि साइकिल ट्रैवल फ्रैंडली है। साइकिल को लेकर आप किसी भी संकरी, पहाड़ी, रेगिस्तान सड़कों पर जा सकते हैं। इससे हेल्थ भी बेहतर रहेगी। पर्यावरण को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। साइकिल चलाकर उसमें भी सहयोग दे रहे हैं। साइकिल से ना तो प्रदूषण होगा और ना ही आपको ईंधन की चिंता करनी पड़ेगी।
रविंदर का कहना है कि साइकिल ट्रैवल फ्रैंडली है। साइकिल को लेकर आप किसी भी संकरी, पहाड़ी, रेगिस्तान सड़कों पर जा सकते हैं। इससे हेल्थ भी बेहतर रहेगी। पर्यावरण को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। साइकिल चलाकर उसमें भी सहयोग दे रहे हैं। साइकिल से ना तो प्रदूषण होगा और ना ही आपको ईंधन की चिंता करनी पड़ेगी।