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...और जब आखिरी बार सुषमा स्वराज आईं थीं अपने मायके, तो भाई-भाभी से जताई थी ये ख्वाहिश
Wed, 07 Aug 2019 02:12 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 07 Aug 2019 02:12 PM IST
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सुषमा स्वराज
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जब आखिरी बार अपने मायके आई थीं, तो भाई और भाभी से उन्होंने एक इच्छा जाहिर की थी। जिसे बड़े चाव से पूरा भी किया गया था, पढ़ें दिलचस्प किस्सा...
सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज 18 दिसंबर 2018 को हरियाणा के अंबाला कैंट स्थित अपने पैतृक निवास पर भाई डॉक्टर गुलशन राय शर्मा का हाल जानने के लिए आई थीं। तब पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में उनके स्वागत के लिए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा था, लेकिन सुषमा ने सभी को हाथ जोड़ते हुए कहा कि वह पहले अपने भाई का हाल जानने घर जाएंगी, उसके बाद वह सभी से मिलेंगी।
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सुषमा स्वराज
जब वे घर पहुंची थीं तो उन्होंने भाई-भाभी के साथ गाजर का हलवा और दही भल्ले खाए थे। भाई ने बताया कि सुषमा को खाना बहुत भाता है। सुषमा भले ही केंद्रीय राजनीति का सितारा बन गई थीं, लेकिन अंबाला से उनका लगाव कम नहीं हुआ था। सुषमा अपने रिश्तो को भी राजनीति से परे जाकर बखूबी निभाती थीं। वह हर साल रक्षाबंधन और भैया दूज पर उन्हें राखी बांधने और तिलक लगाने अंबाला जरूर आती थीं।
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सुषमा स्वराज
- फोटो : ANI
डॉक्टर गुलशन रॉय शर्मा ने बताया कि सुषमा राजनीति और अपने परिवार को अलग-अलग रखती थीं। वह इस बात का बहुत ध्यान रखती थीं कि राजनीति और परिवार दोनों उलझकर किसी तरह के दुरुपयोग का सबब न बन जाएं। इसलिए कई बार ऐसा होता था कि सुषमा स्वराज दोनों त्योहारों पर जब अंबाला आती थीं, तो बहुत कम लोगों को ही उनके आने-जाने की जानकारी होती थी। सुषमा के मुंह बोले भाई राज सिंह ने बताया कि सुषमा उन्हें भी हर साल राखी बांधतीं और टीका करती थीं।
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सुषमा स्वराज
बता दें कि सुषमा स्वराज के भाई डॉ. गुलशन राय शर्मा अभी भी कैंट के बीसी बाजार में क्लीनिक चलाते हैं। पिता हरदेव शर्मा भी वैद्य थे। वे गंभीर बीमारियों का देसी दवाओं से उपचार करने में माहिर थे। सुषमा की छोटी बहन वंदना शर्मा हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की मेंबर हैं। सुषमा स्वराज ने अंबाला के एसडी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद एसडी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की और सक्रिय राजनीति में आईं।
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