जीएसटी लागू होने के बाद अभी तक सेना के अधीनस्थ सीएसडी (कैंटीन स्टोर डिपो) उबरी नहीं है, जिसका खामियाजा सेना के अफसरों व जवानों को भुगतना पड़ रहा है।
इन कैंटीनों में उत्पादों की सप्लाई लगभग ठप पड़ी है। ये कैंटीनें मंदी के दौर से गुजर रही हैं।
तीस जून आधी रात को देशभर में जीएसटी लागू होने के बाद से सैन्य क्षेत्रों में स्थित तमाम सीएसडी में भी असमंजस की स्थिति बन गई थी। क्योंकि इन कैंटीनों में विभिन्न तरह के माल का काफी स्टॉक मौजूद था। सब एरिया हेडक्वार्टर के अंतर्गत उत्तर भारत के सैन्य क्षेत्रों में भी काफी संख्या में सीएसडी मौजूद हैं, लेकिन अब चूंकि सीएसडी में मौजूद तमाम उत्पाद भी जीएसटी के दायरे में आ गए, इसलिए सीएसडी संचालकों को भी इस बाबत हाईकमान से दिशा-निर्देशों का इंतजार था।
बाद में यह स्पष्ट हो गया कि सीएसडी में भी तमाम माल जीएसटी की जद में ही रहेगा, इसलिए बड़ी चुनौती यह बनी कि इन सीएसडी में पड़ा पुराना स्टॉक जल्द से जल्द क्लीयर किया जाए। अब जीएसटी लागू होने के 27 दिन बाद तमाम सीएसडी में उत्पादों का स्टॉक तो लगभग खत्म हो गया है, लेकिन उत्पादों की सप्लाई न के बराबर है। इसके चलते ये सीएसडी धीरे-धीरे खाली होते जा रही हैं और इस वक्त जबरदस्त मंदी की जद में हैं।
भटक रहे जवान और अफसर
जीएसटी में उत्पादों के अभाव में सेना के जवान और अफसरों को न केवल भटकना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें अच्छी खासी चपत भी लग रही है। क्योंकि यहां सीएसडी में सैन्य कर्मियों को विभिन्न उत्पाद एमआरपी से काफी सस्ती दरों पर मिलते हैं, लेकिन चूंकि अधिकतर सीएसडी उत्पादों से खाली हो रहे हैं, तो रोजमर्रा के सामान की पूर्ति के लिए सैन्य कर्मियों को सिविल बाजारों का रुख करना पड़ रहा है और वहां से महंगा सामान खरीदना पड़ रहा है।