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युवराज का मैच क्यों नहीं देखते थे पापा, संन्यास पर कई खुलासे, पिता से लिपट कर क्यूं रो रहे थे युवी

Tue, 11 Jun 2019 08:22 PM IST
ajay kumar संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 11 Jun 2019 08:22 PM IST
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Story of Yuvraj singh retirement from international cricket
युवराज सिंह ने लिया संन्यास - फोटो : अमर उजाला

मुझे अपने बेटे पर नाज है। उसने मेरी जिद के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया। मेरी भगवान से यही दुआ है कि युवी अगले जन्म में भी मेरा ही बेटा बने और क्रिकेट में देश का नाम रोशन करे। यह बात सिक्सर किंग के नाम से मशहूर टीम इंडिया के धाकड़ बल्लेबाज युवी के पिता योगराज ने कही। उन्होंने कहा कि युवी की रिटायरमेंट ग्राउंड में अपने साथी क्रिकेटर और फैंस के सामने होती तो बेहतर होता। 

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युवराज सिंह - फोटो : अमर उजाला

यह टीस उनके मन में हमेशा रहेगी। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए भी देश के लिए अच्छा क्रिकेट खेला। उन्हें अपने बेटे पर फख्र है। योगराज सिंह ने बताया कि युवी ने उनके साथ बैठकर संन्यास का फैसला लिया था। ये मेरा और युवराज सिंह का निर्णय था। हम दोनों वर्ल्ड कप का ही इंतजार कर रहे थे। योगराज सिंह ने कहा कि जब लगभग 40 साल पहले मुझे टीम इंडिया से ड्रॉप किया गया था तो उस दर्द को मैं भूल नहीं पाया। तब मैंने ठान लिया कि एक दिन में अपने बेटे को भारतीय टीम में जगह दिला कर रहूंगा। इसके लिए मैंने न दिन देखा न रात। अपने घर को ही क्रिकेट के मैदान पर तब्दील कर दिया।

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युवराज सिंह - फोटो : अमर उजाला

मेरी मां मुझे बोलती थी कि तू यूवी को क्रिकेटर बनाने के जुनून में खराब मत कर देना। लेकिन मैंने किसी की नही सुनी न मां कि और न ही अपनी पत्नी की, दिन रात लगा रहा। उसका फल मुझे मिला। जो सपना मेरे आंखों ने देखा था और जो दर्द की टीस मेरे दिल में थी मेरे बेटे ने पूरा किया। योगराज सिंह ने बताया कि आज से लगभग 10 दिन पहले जब वह और युवी एक डॉक्यूमेंट्री के लिए सेक्टर- 16 के स्टेडियम में बैठे थे तो उसने मुझसे अपने रिटायरमेंट की बात बताई।

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युवराज सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

इस बात को लेकर हम एक दूसरे को बाहों में लेकर काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान उसकी आंखों से आंसू छलक आए और मैं भी काफी भावुक हो गया। योगराज सिंह ने बताया कि फुटबॉल के खेल में अगर किसी खिलाड़ी का घुटना टूट जाए तो वह शायद की कभी वापसी करता हो। वहीं अगर कैंसर हुआ हो तो मैं नहीं मानता कि वह वापसी करे। लेकिन मेरे बेटे ने घुटना टूटने और कैंसर को मात देने के बाद एक चैंपियन की तरह मैदान पर वापसी की।

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युवराज सिंह - फोटो : पीटीआई

मैं अपने बेटे को सेल्यूट करता हूं। अगर युवी का घुटना और कैंसर न हुआ होता वह क्रिकेट वर्ल्ड के सारे रिकॉर्ड तोड़ देता। योगराज सिंह ने बीसीसीआई का धन्यवाद करते हुए कहा कि कैंसर के दौर में बोर्ड ने युवराज सिंह की पूरी मदद की। मेडिकल से लेकर हर प्रकार की सुविधाएं दीं। वह दौर मेरे परिवार के लिए सबसे बुरा दौर था। युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह आजतक अपने बेटे का एक भी मुकाबला देखने के लिए स्टेडियम में नहीं गए। मोहाली में होने वाले किसी भी टेस्ट, वनडे, आईपीएल के मुकाबले जिसमें युवी खेलता था वह आज तक उसे देखने मैदान पर नहीं गए। उनका मानना था कि जिस दिन वह बेटे को देखने मैदान पर जाएंगे तो वह जल्द ही आउट हो जाएगा।

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