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पंपोर में शहीद वीर सपूत को राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र से नवाजा, पढ़ें शहादत की कहानी

Fri, 24 Mar 2017 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद(हरियाणा) Updated Fri, 24 Mar 2017 09:23 AM IST
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shaurya chakra 2017 to pampore terror attack martyr captain pawan kumar beinwal
शहीद कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल
पंपोर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए वीर सपूत को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मरणोपरांत शौर्य चक्र से नवाजा। पढ़ें इनकी शहादत की कहानी।
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शहीद कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल
शहीद कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल के पिता राजबीर खटकड़ ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों से यह सम्मान लिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से शौर्य चक्र मिलना बड़ा सम्मान है, वहीं प्रदेश सरकार ने इसे अनदेखा किया है। प्रदेश सरकार ने शहीद कैप्टन पवन कुमार के पैतृक गांव बधाना में करनाल में बनने वाले बागवानी विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर बनाने की घोषणा की है। इस पर भी काम शुरू नहीं हुआ है।
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शहीद कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल
बता दें कि पिछले साल 20 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पंपोर में आंतकी मुठभेड़ में कैप्टन पवन कुमार खटकड़ शहीद हो गया था। जम्मू कश्मीर के पुलिस उप महानिरीक्षक गुलाम हसन बट्ट ने कैप्टन पवन की मौत की पुष्टि की थी। 23 वर्षीय कैप्टन पवन हरियाणा के जींद के रहने वाले थे और भारतीय सेना के 10 पैरा कमांडो में कैप्टन थे। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे।
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शहीद कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल
कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल का जन्म 15 जनवरी 1993 में हुआ था। संयोग देखिए जिस दिन आर्मी अपना 'बर्थडे' सेलिब्रेट करती है उसी दिन कैप्टन भी अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करते थे। कैप्टन पवन की शहीदी पर उनके पिता राजबीर सिंह ने कहा कि उनको गर्व है कि उनका इकलौता बेटा देश के लिए शहीद हो गया। सेना में शामिल होना और देश के लिए कुर्बान होना उनकी किस्मत में था।

 
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शहीद कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल
सिर्फ 23 वर्ष उम्र के युवाओं में कार, फैंसी स्‍मार्ट फोन, डिजायनर आउटफिट, दोस्‍तों के साथ हैंगआउट करने का शौक होता है। श्रीनगर में शहीद हुए कैप्‍टन पवन कुमार बेनीवाल भी इसी तरह के शौक रखते थे, लेकिन एक बात जो उन्‍हें बाकी युवाओं से अलग करती थी, वह थी देश और सेना के लिए उनका जुनून और समर्पण की भावना, जिसने उसे इतना बड़ा सम्मान दिलाया।
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