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तस्वीरों में देखें शहीद भगत सिंह का गुप्त ठिकाना: यहीं से था दिल्ली व कानपुर आना-जाना और सीखा था गोली चलाना

Wed, 23 Mar 2022 01:12 AM IST
ajay kumar अनिल कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर (पंजाब)
अनिल कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 23 Mar 2022 01:12 AM IST
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Shaheed Bhagat Singh Secret House At Firozpur Of Punjab
शहीद दिवस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके साथियों ने क्रांतिकारी पार्टी की स्थापना की थी और उसकी सरगर्मियों के लिए देश के कई हिस्सों में ठिकाने स्थापित किए थे। पाकिस्तान के रावलपिंडी का गुप्त ठिकाना बंद कर 10 अगस्त 1928 में फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार (शाहगंज) में गुप्त ठिकाना बनाया था, जो क्रांतिकारियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण था। क्रांतिकारी यहां से वेशभूषा बदल कर यूपी और बिहार जाते थे। 

Shaheed Bhagat Singh Secret House At Firozpur Of Punjab
तूड़ी बाजार में बना क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

पार्टी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बिहार में अंग्रेजों का खजाना लूटा जाता था। जिसके लिए भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसीलिए भगत सिंह की पहचान छिपाने के लिए फिरोजपुर के गुप्त ठिकाने में उनकी दाढ़ी और केश क्रांतिकारी सुखदेव ने काटे थे, तब यहां से ट्रेन के जरिये बिहार पहुंचे थे। किसी कारणों से नौ फरवरी 1929 को ये ठिकाना क्रांतिकारियों को छोड़ना पड़ा और आगरा चले गए। आज भी दूर-दराज के लोग इस ठिकाने को देखने आते हैं।

Shaheed Bhagat Singh Secret House At Firozpur Of Punjab
शहीदों का गुप्त ठिकाना। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

फिरोजपुर में बने गुप्त ठिकाने में क्रांतिकारियों ने देश को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए थे, इसीलिए ये ठिकाना चर्चा में रहा है, ये इमारत आज भी सुरक्षित है, जिसे दूर-दराज से लोग देखने पहुंचते हैं। पिछले सात साल से यहां के लोग इसे क्रांतिकारियों की यादगार बनाने की मांग कर रहे हैं। इस ठिकाने में ब्रिटिश अधिकारी साण्डर्स की हत्या से पहले एयर पिस्टल से क्रांतिकारी निशानेबाजी करते थे। क्रांतिकारी शिव वर्मा ने ठिकाने में बैठकर ‘चांद’ के फांसी विशेष अंक के लिए कुछ शहीदों की जीवनियां लिखीं थी। 

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Shaheed Bhagat Singh Secret House At Firozpur Of Punjab
शहीद भगत सिंह, शिव वर्मा व चंद्रशेखर आजाद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

क्रांतिकारी डॉ. गया प्रसाद ने लेखराज को अपनी एक फर्जी पहचान डॉ. बीएस निगम बताकर मकान किराए लिया और फिरोजपुर में गुप्त ठिकाना बनाया। उन्होंने नीचे दवाखाना और ऊपर रिहायश बनाई थी और दुकान पर निगम फार्मेसी और ड्रग्सिट का बोर्ड लगाया था। इस ठिकाने को बनाने के तीन कारण थे। पहला क्रांतिकारी जो पंजाब से विभिन्न ठिकानों जैसे दिल्ली, कानपुर, बिहार, लखनऊ व आगरा से आते-जाते हैं, वह यहां पर भेष बदलकर ट्रेनों में यात्रा कर सकें। दूसरा बम बनाने का सामान जुटाने के लिए क्रांतिकारी डॉ. निगम को निगम फार्मेसी और ड्रग्सिट की दुकान खुलवाई थी। तीसरा डॉक्टरी पेशा चलने पर पार्टी की आर्थिक सहायता करना था।

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Shaheed Bhagat Singh Secret House At Firozpur Of Punjab
भगत सिंह - फोटो : Twitter/@IndiaHistorypic

इस गुप्त ठिकाने पर भगत सिंह के अलावा चंद्र शेखर आजाद, सुखदेव, शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा, महाबीर सिंह तथा जय गोपाल का आना-जाना था। गुप्त ठिकाने वाली इमारत श्री कृष्णा मंदिर ट्रस्ट के अधीन है। ट्रस्ट ही इमारत का किराया वसूलती है। पुरातन विभाग ने यादगार बनाने के संबंध नोटिफिकेशन भी जारी किया था लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ। लोगों की मांग है कि इस इमारत को राष्ट्रीय विरासत बनाया जाए, ताकि उन शहीदों की यादें जिंदा रहे और नई पीढ़ी उनके पद चिन्हों पर चले। 

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