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पीडियाट्रिक वार्ड : बाथरूम की टोंटियां खराब, वार्ड के बाहर बेड लगाकर किया जा रहा बच्चों का इलाज
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मोहाली। फेज-6 के सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में बच्चों की बढ़ती संख्या के बीच व्यवस्थाएं प्रभावित होने लगी हैं। वार्ड के शौचालय की कुछ टोंटियां खराब होने से बच्चों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड में बेड कम पड़ने के कारण बाहर अतिरिक्त बेड लगाकर बच्चों का इलाज किया जा रहा है। इससे परिजनों में बच्चों को संक्रमण होने का डर बना हुआ है। परिजनों का कहना है कि छोटे बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल लाने के बाद यदि उन्हें वार्ड की जगह बाहर रखना पड़े तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से वार्ड की साफ-सफाई, बाथरूम और मरीजों के लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था जल्द दुरुस्त करने की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पीडियाट्रिक वार्ड में सात बेड की व्यवस्था है। फिलहाल वार्ड में रिपेयर का काम चलने के कारण इन बेड को बाहर लगाया गया है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त बेड की व्यवस्था भी की जा रही है। संवाद
ओपीडी में रोजाना आ रहे करीब 150 बच्चे
मौसम में बदलाव के बाद बच्चों में वायरल बुखार, खांसी-जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों के मामले बढ़े हैं। इसके चलते पीडियाट्रिक वार्ड के साथ ओपीडी में भी बच्चों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल के अनुसार आम दिनों में जहां रोजाना करीब 100 बच्चे ओपीडी में इलाज के लिए आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 150 हो गई है। वहीं, वार्ड में संक्रमण के कारण बच्चों को भर्ती करने की जरूरत भी बढ़ी है। उपलब्ध बेड पर मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अतिरिक्त बेड लगाने पड़ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि बच्चों के इलाज के लिए पर्याप्त जगह और स्वच्छ वातावरण बेहद जरूरी है। वार्ड के बाथरूम में खराब टोंटियों के कारण पानी की सुविधा प्रभावित होने की शिकायत भी सामने आई है। बच्चों के साथ अस्पताल में रहने वाले परिजनों को बाथरूम इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि भर्ती बच्चों और तीमारदारों को साफ पानी और स्वच्छ बाथरूम की सुविधा मिलनी चाहिए। लंबे समय तक समस्या दूर नहीं होने से परेशानी बढ़ रही है।
लोगों की परेशानी, उनकी जुबानी
झूझार नगर निवासी गीता ने बताया कि वार्ड के बाहर बेड लगाए जाने से बच्चों का अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले लोगों के संपर्क में आने का खतरा रहता है। ऐसे में बच्चों में संक्रमण को लेकर चिंता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि बच्चों के वार्ड में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के इंतजाम प्राथमिकता के आधार पर किए जाने चाहिए।
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खरड़ निवासी अनु ने बताया कि वह अपने बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल लेकर आई हैं। वार्ड के बाहर बेड लगाए जाने से उन्हें चिंता हो रही है। उनका कहना है कि बच्चों के मामले में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
झूझार नगर निवासी सविता ने कहा कि मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ अस्पताल में जगह की समस्या सामने आ रही है। बच्चों के वार्ड के बाहर भी पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि मरीजों और तीमारदारों को परेशानी न हो।
फेज-6 निवासी पूजा ने कहा कि अस्पताल में इलाज के साथ सफाई व्यवस्था भी बेहतर होना जरूरी है। खासकर बच्चों के वार्ड में बाथरूम और आसपास के क्षेत्र की नियमित सफाई होनी चाहिए।
अस्पताल में निर्माण कार्य के कारण कुछ स्थानों पर व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। बाथरूम की टोंटियों और सफाई से संबंधित समस्या को ठीक कराने के लिए संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों के इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए उपलब्ध संसाधनों के अनुसार व्यवस्था की जा रही है। वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त बेड भी लगाए जाते हैं, ताकि मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने में दिक्कत न हो। - डॉ. अमित अग्रवाल, एडिशनल एमएस
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ओपीडी में रोजाना आ रहे करीब 150 बच्चे
मौसम में बदलाव के बाद बच्चों में वायरल बुखार, खांसी-जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों के मामले बढ़े हैं। इसके चलते पीडियाट्रिक वार्ड के साथ ओपीडी में भी बच्चों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल के अनुसार आम दिनों में जहां रोजाना करीब 100 बच्चे ओपीडी में इलाज के लिए आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 150 हो गई है। वहीं, वार्ड में संक्रमण के कारण बच्चों को भर्ती करने की जरूरत भी बढ़ी है। उपलब्ध बेड पर मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अतिरिक्त बेड लगाने पड़ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि बच्चों के इलाज के लिए पर्याप्त जगह और स्वच्छ वातावरण बेहद जरूरी है। वार्ड के बाथरूम में खराब टोंटियों के कारण पानी की सुविधा प्रभावित होने की शिकायत भी सामने आई है। बच्चों के साथ अस्पताल में रहने वाले परिजनों को बाथरूम इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि भर्ती बच्चों और तीमारदारों को साफ पानी और स्वच्छ बाथरूम की सुविधा मिलनी चाहिए। लंबे समय तक समस्या दूर नहीं होने से परेशानी बढ़ रही है।
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लोगों की परेशानी, उनकी जुबानी
झूझार नगर निवासी गीता ने बताया कि वार्ड के बाहर बेड लगाए जाने से बच्चों का अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले लोगों के संपर्क में आने का खतरा रहता है। ऐसे में बच्चों में संक्रमण को लेकर चिंता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि बच्चों के वार्ड में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के इंतजाम प्राथमिकता के आधार पर किए जाने चाहिए।
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खरड़ निवासी अनु ने बताया कि वह अपने बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल लेकर आई हैं। वार्ड के बाहर बेड लगाए जाने से उन्हें चिंता हो रही है। उनका कहना है कि बच्चों के मामले में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
झूझार नगर निवासी सविता ने कहा कि मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ अस्पताल में जगह की समस्या सामने आ रही है। बच्चों के वार्ड के बाहर भी पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि मरीजों और तीमारदारों को परेशानी न हो।
फेज-6 निवासी पूजा ने कहा कि अस्पताल में इलाज के साथ सफाई व्यवस्था भी बेहतर होना जरूरी है। खासकर बच्चों के वार्ड में बाथरूम और आसपास के क्षेत्र की नियमित सफाई होनी चाहिए।
अस्पताल में निर्माण कार्य के कारण कुछ स्थानों पर व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। बाथरूम की टोंटियों और सफाई से संबंधित समस्या को ठीक कराने के लिए संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों के इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए उपलब्ध संसाधनों के अनुसार व्यवस्था की जा रही है। वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त बेड भी लगाए जाते हैं, ताकि मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने में दिक्कत न हो। - डॉ. अमित अग्रवाल, एडिशनल एमएस