शहीद भगत सिंह ने जिस पिस्तौल से ब्रिटिश जनरल सांडर्स को मारा था, वह 90 साल बाद दुनिया के सामने आ गई है। आप भी देख लीजिए तस्वीरों में।
90 साल पहले 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह ने अंग्रेज अफसर जॉन सांडर्स को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। साइमन कमीशन की खिलाफत करते हुए लाठीचार्ज में घायल होकर लाला लाजपत राय ने दम तोड़ दिया था। लाला जी की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह और राजगुरू ने सांडर्स को मार डाला था। प्वाइंट 32 कॉल्ट की जिस पिस्टल से यह काम किया गया, वह मिल गई है और देश में ही है।
इंदौर स्थित सेंट्रल स्कूल आफ वेपंस एंड टैक्टिस (सीएसडब्ल्यूटी) के संग्रहालय में यह पिस्टल रखी गई है और इसे लोगों को दिखाया जा रहा है। भगत सिंह के भतीजे करनजीत सिंह संधू और अभय संधू भी इसे देखने के लिए पहुंचे तो वे भावुक हो गए। वे 27 जनवरी को इसे देखने गए और उन्होंने इसे सिर माथे लगाकर नमन भी किया। उनके साथ राजगुरु के भतीजे सत्यशील राजगुरु और हर्षवर्धन राजगुरु भी थे।
बता दें कि करणजीत सिंह संधू ने इसे वापिस पंजाब लाने की मांग करते हुए सरकार को पत्र लिखा था। पंजाब सरकार ने पत्र लिखकर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से यह पिस्टल मांगी। बीती 24 जनवरी को बीएसएफ के नई दिल्ली स्थित हेडक्वार्टर को भेजे पत्र में लिखा कि सरकार इस पिस्टल को राज्य के सैरसपाटा व सभ्याचारक मामले विभाग की तरफ से शहीद भगत सिंह की जन्मस्थल खटकड़कलां में स्थापित संग्रहालय में सुशोभित करना चाहती है।
करणजीत सिंह संधू ने बताया कि अक्टूबर, 1969 तक शहीद भगत सिंह की यह पिस्टल पंजाब पुलिस अकादमी फिल्लौर के कब्जे में थी। फिल्लौर अकादमी की फाइलों से मिली पिस्तौल की डिटेल में पता चला कि उक्त पिस्तौल को फिल्लौर अकादमी में 7 अक्टूबर, 1969 को 7 अन्य हथियारों के साथ इंदौर सीएसडब्ल्यूटी ट्रांसफर किया गया। यहां द्वितीय विश्व युद्ध के हथियारों के साथ इसे म्यूजियम में डिस्प्ले कर दिया गया। हथियार खराब न हो इसलिए इस पर पेंट किया गया।