Pics: इस पिस्तौल से भगत सिंह ने सांडर्स को मारा था, दशकों बाद देख रही है दुनिया
17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह ने अंग्रेज अफसर जॉन सांडर्स को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। साइमन कमीशन की खिलाफत करते हुए लाठीचार्ज में घायल होकर लाला लाजपत राय ने दम तोड़ दिया था। लाला जी की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह और राजगुरु ने सांडर्स को मार डाला था। प्वाइंट 32 कॉल्ट की जिस पिस्टल से यह काम किया गया, वह मिल गई है और देश में ही है।
इंदौर स्थित सेंट्रल स्कूल आफ वेपंस एंड टैक्टिस (सीएसडब्ल्यूटी) के संग्रहालय में यह पिस्टल रखी गई है और इसे लोगों को दिखाया जा रहा है। भगत सिंह के भतीजे करणजीत सिंह संधू और अभय संधू भी इसे देखने के लिए पहुंचे तो वे भावुक हो गए। वे 27 जनवरी को इसे देखने गए और उन्होंने इसे सिर माथे लगाकर नमन भी किया। उनके साथ राजगुरु के भतीजे सत्यशील राजगुरु और हर्षवर्धन राजगुरु भी थे।
बता दें कि करणजीत सिंह संधू ने इसे वापस पंजाब लाने की मांग करते हुए सरकार को पत्र लिखा था। पंजाब सरकार ने पत्र लिखकर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से यह पिस्टल मांगी थी। सरकार इस पिस्टल को शहीद भगत सिंह के जन्मस्थल खटकड़कलां में बने संग्रहालय में सुशोभित करना चाहती है।
करणजीत सिंह संधू ने बताया कि अक्टूबर, 1969 तक शहीद भगत सिंह की यह पिस्टल पंजाब पुलिस अकादमी फिल्लौर के कब्जे में थी। फिल्लौर अकादमी की फाइलों से मिली पिस्तौल की डिटेल में पता चला कि उक्त पिस्तौल को फिल्लौर अकादमी में 7 अक्टूबर, 1969 को 7 अन्य हथियारों के साथ इंदौर सीएसडब्ल्यूटी ट्रांसफर किया गया। यहां द्वितीय विश्व युद्ध के हथियारों के साथ इसे म्यूजियम में डिस्प्ले कर दिया गया। हथियार खराब न हो इसलिए इस पर पेंट किया गया।
हाल में जब पिस्तौल भगत सिंह की होने की जानकारी मिली तो बीएसएफ ने इसकी डिटेल के आधार पर इंदौर स्थित म्यूजियम के हथियारों की जांच कराई थी। डिस्प्ले हथियारों के अलावा कुछ हथियार एक बंद कमरे में रखे गए हैं। यह कमरा खोला तो 1969 में इंदौर लाई गई पिस्तौल मिली। केमिकल से इसका पेंट हटाकर भगत सिंह की अमेरिका में बनी 0.32 बोर, बट नंबर 460-एम, बॉडी नंबर-168896 वाली यह पिस्तौल से नंबर मैच हुआ है।
करणजीत सिंह संधू ने बताया कि जब उन्होंने इसके सीरियल नंबर को रिकॉर्ड्स के साथ मैच किया तो दोनों ही नंबर एक निकले। म्यूजियम इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं को अपने अंदर समेटे हुए है। यहां पर आपको कई तरह के ऐतिहासिक हथियार देखने को मिल जाएंगे।