पद्मश्री अवार्ड के लिए चयनित पहलवान साक्षी मालिक को ओलंपिक में कांस्य पदक मिलने में उसके खेल के साथ किस्मत का बहुत बड़ा हाथ है। देखिए, कैसे?
ओलंपिक में जाने से पहले ही साक्षी का भाग्य बलवान होने की बात साबित हो गई थी। क्योंकि 58 किलो भारवर्ग की पहलवान गीता फौगाट पर पहले वर्ल्ड ओलंपिक गेम्स क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के बाद बैन लग गया। इससे साक्षी को ओलंपिक में क्वालीफाई करने का मौका दिया गया, जिसे साक्षी ने बखूबी भुनाया।
अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए गीता के तुर्की में हुए दूसरे वर्ल्ड ओलंपिक गेम्स क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में खेलने पर रोक लगा दी। इस तरह भाग्य ने साक्षी का साथ दिया और उसे तुर्की भेजने का फैसला लिया गया। जहां साक्षी ने रजत पदक जीत ओलंपिक का टिकट, बल्कि ओलंपिक मेडल भी पक्का कर लिया।
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Sakshi malik
- फोटो : PTI
ओलंपिक में कुश्ती मुकाबले में साक्षी मलिक अपने पहले मुकाबले को हार गई थी, लेकिन यहां भी किस्मत ने साथ दिया। रेपरेज में उसे फिर मौका मिला, जिसे भुनाते हुए उसने ओलंपिक में कांस्य पदक पक्का कर लिया। अन्य पहलवानों बबीता फोगाट, योगेश्वर दत्त और जितेंद्र तोमर को ऐसे मौके नहीं मिल पाए।
सूत्रों की मानें तो कॉमनवेल्थ में मेडल जीतने के बाद उसे कई परिजनों ने कुश्ती छोड़ने की सलाह दी थी। कहा गया कि अब वह कुश्ती की जगह पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे, लेकिन साक्षी ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि वह कुश्ती के साथ पढ़ाई करती रहेगी। ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी ने एमपीएड तक पढ़ाई अच्छे नंबरों से पास होकर की।