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10-10 घंटे मेहनत करने के बाद भी नहीं थकतीं थी... साक्षी यूं बनी धाकड़ पहलवान

Sun, 14 May 2017 09:19 AM IST
amarujala.com- presented by: खुशबू गोयल
amarujala.com- presented by: खुशबू गोयल Updated Sun, 14 May 2017 09:19 AM IST
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sakshi malik struggle story from lucknow sai center to rio olympic and asian championship
ओलंपियन पहलवान साक्षी मलिक
ओलंपिक मेडल विजेता साक्षी मलिक के पहलवान बनने के पीछे एक खास वजह रही। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की, थकना तो जैसे उन्होंने सीखा ही नहीं।
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पहलवान साक्षी मलिक
साक्षी मलिक की जिस सफलता पर आज पूरा भारत इतरा रहा है, उसकी इबारत लखनऊ के साई सेंटर में लिखी गई थी। साक्षी की साथी खिलाड़ियों ने बताया कि साक्षी के अंदर कुश्ती के प्रति जुनून है। दिन में 10-10 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद भी वह थकती नहीं। अक्सर कहती, तब तक बिना रुके पसीना बहाती रहूंगी, जब तक ओलंपिक में देश के लिए मेडल न जीत लूं।
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साक्षी मलिक की शादी
साई सेंटर में महिला पहलवानों और कुश्ती के प्रशिक्षकों ने गुरुवार को एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर साक्षी की जीत का जश्न मनाया। साक्षी ने 2013 में यहां इंडिया कैम्प जॉइन किया था। पिछले तीन साल से वह यहां कड़ी ट्रेनिंग कर रही थी। शायद ही कोई ऐसा दिन गया हो जब उसने ट्रेनिंग न की हो। कोच कृपाशंकर ने बताया कि साक्षी बेहद आक्रामक खिलाड़ी है।
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साक्षी मलिक
उसकी एक ही कोशिश होती है कि सामने वाले को कैसे चित किया जाए। उसमें कुश्ती के अलग-अलग पैंतरों को देखकर सीखने की अद्भुत क्षमता है। वह एक बार जिस दांव को देखती, उसे तुरंत ही सीख लेती। रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग मुकाबले लखनऊ में ही हुए थे। इन मुकाबलों में साक्षी ने गीता फोगाट और सरिता को शिकस्त देकर भारतीय महिला कुश्ती टीम में अपनी जगह बनाई थी।
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ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक
लखनऊ साई सब सेंटर के खिलाड़ियों ने बताया कि साक्षी को कुश्ती के खेल से इतना लगाव है कि उसके इसके अलावा कुछ भी नहीं दिखाई देता। दूसरे खिलाड़ी भले ही फुरसत के पलों में फिल्म, टीवी या फैमिली की बात करते, लेकिन साक्षी सिर्फ कुश्ती की ही बात करती। उसे कुश्ती के मुकाबलों का पूरा शेड्यूल याद रहता था।
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