साक्षी मलिक की निजी जिंदगी से जुड़ा एक शख्स वो भी था, जो नहीं चाहता था कि वे पहलवान बनें। उसके बावजूद साक्षी हारीं नहीं और इतिहास रच दिया।
और जब इतिहास रचा गया, तब वहीं शख्स सबसे ज्यादा खुश हुआ। हम बात कर रहे हैं साक्षी मलिक की मां सुदेश मलिक की, जो नहीं चाहती थीं कि साक्षी पहलवान बनें, पर जब उसी बेटी ने दुनिया भर में उनका नाम चमका दिया तो वे भावुक हो उठीं और बोलीं कि हमारी बेटी के साथ हर किसी की दुआ थी, इसलिए वह अच्छा खेली। डटकर खेली और दो मैच जीत लिए। क्वार्टर फाइनल में हार गई, लेकिन उससे कोई शिकायत नहीं है।
इस तरह साक्षी को पहली बार अखाड़े में लेकर जाने वाली उसकी मां सुदेश ने अपने मन की बात कही। बेटी के क्वार्टर फाइनल में हारने के बाद थोड़ी मायूसी जरूर दिखी। लेकिन साक्षी के प्रदर्शन से वह काफी संतुष्ट भी दिखी। उधर, जीत के बाद साक्षी के पिता सुखबीर मलिक ने कहा, "कुछ साल पहले केवल ड्रेस के लिए कुश्ती लड़ने वाली साक्षी इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगी, यह किसी ने नहीं सोचा था।
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साक्षी मलिक
- फोटो : Amar ujala
सुखबीर मलिक ने कहा कि साक्षी ने बहुत छोटी उम्र में सब जूनियर एशियन चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता। कॉमनवेल्थ में सिल्वर मेडल जीता, लेकिन अपने पहले ओलिंपिक में ही देश के लिए मेडल जीतकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। मैं अपनी मन्नत के अनुसार ऋषिकेश से नीलकंठ तक पैदल जाऊंगा और अपनी इस मन्नत को जरूर पूरा करुंगा।
जब भी पहलवान साक्षी मलिक का मुकाबला होता है तो वह अपने दादा.दादी चंद्रावली व बदलूराम का नाम लेकर मैदान में उतरती है। बुधवार को भी मुकाबला था तो मां ने खास हिदायत दी थी कि तेरे वही भगवान हैं। मां से फोन पर जब साक्षी ने बात की थी तो उसने दिली तमन्ना जाहिर करते हुए कहा कि मैं दादा.दादी को आज मिस कर रही हूंए लेकिन यह भी कहा कि मैं मैदान में उन्हीं का नाम लेकर उतरूंगी।