रियो पैरालंपिक में इतिहास रचने वाली सोनीपत की दीपा मलिक को बेहद जानलेवा बीमारी थी। 183 टांके लगे थे। जानिए, इनके बारे में।
सोनीपत के भैंसवाल गांव की दीपा मलिक ने स्पाइन ट्यूमर से जंग जीती और फिर खेल में मेडल के अंबार लगा डाले। पैरालंपिक मेडलिस्ट दीपा मलिक जिस समय ट्यूमर जैसी बीमारी से जंग लड़ रही थी और घर में बिस्तर पर थी। उसी समय उनके पति कर्नल विक्रम सिंह कारगिल में देश के लिए जंग लड़ रहे थे। उस दौरान ही दीपा की स्पाइनल ट्यूमर सर्जरी हुई और उनको 183 टांके लगे थे।
सामाजिक कार्य और लिखने में रुचि रखती हैं दीपा: दीपा खेल में ही आगे नहीं है, वह वह सामाजिक कार्य करने के साथ-साथ लेखन भी करती हैं। गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए कैंपेन चलाती है और सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं। दीपा को लिखने का शौक है और वह अपनी बायोग्राफी से लेकर खिलाड़ियों के बारे में लिखती हैं।
दीपा मलिक ने अपनी उम्र से ज्यादा स्वर्ण पदक जीत कर जज्बे, जोश और जीवटता की मिसाल पेश कर दी है। दीपा की उम्र 46 साल है और उसके पास 50 से ज्यादा स्वर्ण पदक हैं। दीपा मलिक की सल्तनत केवल अपने ही देश में नहीं है, वह विदेशों में पहले भी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है। दीपा शॉट पुटर के अलावा स्विमर, बाइकर, जेवलिन व डिस्कस थ्रोअर है।
7 साल पहले जीता था पहला पदक: दीपा ने 2009 में शॉट पुट में अपना पहला पदक(कांस्य) जीता था। इसके अगले ही साल ऐसा कमाल किया कि इंग्लैंड में शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जेवलिन तीनों में गोल्ड मेडल जीते। उस साल दीपा के सितारे बुलंदी पर रहे और उसने चाइना में पैरा एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता। वहां कांस्य जीतने वाली दीपा पहली भारतीय महिला बनीं।