करीब 96 घंटों से 150 फुट गहरे बोरवेल में फंसे फतेह को निकालने में रुकावटें आ रही हैं। दो दिन से उसमें कोई हलचल भी नहीं और आज उसका जन्मदिन है।
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बोरवेल में फंसा बच्चा
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, जिस बोर में फतेह फंसा है उसके समानांतर करीब तीन फुट चौड़ी टनल खोदकर उसमें सीमेंट की पाइप डाली गई। सौ फुट की गहराई पर पहुंचने पर मिट्टी गीली होने के कारण एक पाइप खिसककर टेढ़ी हो गई, जिसके चलते कई घंटे काम रुका रहा। नई योजना के तहत अब लोहे की पाइप टनल में डाली गई है। वहीं बचाव में ज्यादा समय लगने के कारण परिजनों की चिंता बढ़ गई है। फतेह ने दो दिन से कोई हलचल भी नहीं की है।
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बोरवेल में फंसा बच्चा
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ऑपरेशन ‘फतेह’ के लिए किसी आधुनिक तेज गति वाली तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि दशकों से चली आ रही पुरानी तकनीक अपनाई गई। तीन दिनों तक हाथों से ही मिट्टी निकालने का काम हुआ और ऑपरेशन में काम करने वालों के इस जज्बे को हरेक ने सराहा। सौ फुट नीचे ऑक्सीजन की कमी के कारण बचाव टीम के कुछ सदस्य भी बीमार हो गए। फतेह को निकालने में हो रही देरी को लेकर लोगों ने रोष जताया और सरकार की कारगुजारी पर भी सवाल खड़े किए।
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बोरवेल में फंसा बच्चा
- फोटो : अमर उजाला
सोशल मीडिया पर भी लोग जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि करोड़ों रुपये मूर्तियों और इमारतों पर खर्च करने वाली सरकारें क्या ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई बड़े ऑटो यंत्र नहीं बना सकती। देश को विश्व शक्ति बनाने की सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन धरातल पर आधुनिक तकनीक कहीं भी दिखाई नहीं देती है। चीन में निर्मित कुछ अत्याधुनिक मशीनों की तस्वीरें सांझा करके सरकार से पूछा कि यहां ऐसी मशीनें क्यों मुहैया नहीं करवाई जा रही।
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बोरवेल में फंसा बच्चा
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सोशल मीडिया पर भावुक प्रार्थनाएं
ऑपरेशन ‘फतेह’ के लंबा खींचने और दो साल के फतेहवीर की मासूमियत भरी तस्वीरों को देखकर देशभर के हजारों लोगों की भावनाएं उसके साथ जुड़ गईं है। घटनास्थल पर भी हजारों लोगों का हजूम, चौबीसों घंटे जमा है। सोशल मीडिया पर लोगों ने भावुक प्रार्थनाओं वाली पोस्ट शेयर करके इस मासूम के प्रति अपने जज्बातों का इजहार किया। हर शख्स की जुबान पर एक ही बात थी ‘कि बनया फतेहवीर दा, निकल आया बाहर ठीक ठाक। बस हुण बच्चा जिंदा निकल आवे।’