जिसे सुनने के लिए कभी लोगों की भीड़ उमड़ती थी, लोग दीवाने हुए रहते थे। वो सिंगर आज गुमनामी की ऐसी जिंदगी जी रहा है कि देखने वालों की आंखें भर आएं।
बात हो रही है पंजाबी गायक ईदु शरीफ की। पंजाबी लोक गायकी में खास स्थान रखने वाली सारंगी के जादूगर ईदू शरीफ गुरबत के दिन काट रहे हैं। अपनी गायकी का देश भर में डंका बजाने वाले ईदू को राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम अवार्ड से नवाज चुके हैं। तंगहाली में जी रहे ईदू की सुध ली कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने। सिद्धू सोमवार को उनके मनीमाजरा स्थित घर पहुंचे और दो लाख रुपये की मदद की।
सिद्धू ने कहा कि पंजाबी मां बोली को बुलंदियों पर पहुंचाने वालों की मदद के लिए पूरे पंजाब को उठ खड़े होना चाहिए। ईदू के बेटों सुक्खी और विक्की ने बताया कि उनके पिता पांच साल से बीमार हैं। उनके शरीर पर अधरंग का अटैक हो गया। चलने फिरने में असमर्थ हो गए। इलाज कराने में काफी खर्चा आया। हालात यह हो गए कि कई बार दवाएं बीच में ही छूट गईं। छोटा मोटा काम करके किसी तरह गुजर बसर हो रही है।
उन्हें इस बात का रंज भी है कि इतने बड़े कलाकार होने के बावजूद उनके पिता सामाजिक हाशिये पर ही रहे। किसी ने उनकी सुध नहीं ली। दिल्ली में लाल किले पर जब उन्होंने राष्ट्रपति के समक्ष सारंगी बजाकर कला का प्रदर्शन किया तो कलाम साहब अभिभूत हो गए। उन्होंने 2006 में उनके पिता को राष्ट्रपति अवार्ड से नवाजा। इसके बाद पंजाबी विरसे से जुड़ी कुछ संस्थाओं ने भी उनका सम्मान किया।
लेकिन गरीबी से जूझ रहे इस पंजाबी लोक गायकी के इस हीरे के हालात समझने की जरूरत नहीं समझी। सम्मान पाकर उन्हें खुशी तो है लेकिन पेट भरने के लिए पैसे की जरूरत कहां से पूरी करें। मनीमाजरा के एक अँधेरे से मकान में बदहाली की जिंदगी जी रहे ईदू आज भी सारंगी बजाकर अपने बीते दिनों को याद करते हैं। सारंगी की तान पर गरीबी में भी उनके होठों पर मुस्कान आ ही जाती है।