हम आपको बता रहे हैं दुश्मन देश के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने का असली मकसद और पाकिस्तान के बारे में ऐसी-ऐसी बातें, जिन्हें जानकर देशवासी हैरान रह जाएंगे।
पठानकोट हमले के बाद से ही सेना में बदले का लावा धधक रहा था। उसके बाद उरी हमला हो गया, इसके अलावा भी पाकिस्तान ने कई बार भारतीय फौज के जवानों को निशाना बनाया। परिस्थितियों को देखते हुए, उठ रहे सवालों का जवाब देने और पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला लिया गया। इसे करने के पीछे का असली मकसद मुंहतोड़ जवाब देते हुए दुश्मन को सबक सिखाना था।
सेना के आला अफसरों और सरकार के बीच करीब दस दिन तक प्लानिंग चली और 29 सितंबर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को सबक सिखाते हुए अपनी अवाम की ओर से भी उठ रहे सवालों का जवाब दे दिया गया था। यह जानकारी सर्जिकल स्ट्राइक की निगरानी करने वाले तत्कालीन नॉर्दर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा (रिटायर्ड) ने अमर उजाला से खास बातचीत में साझा किया।
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Surgical Strike
- फोटो : File Photo
लेफ्टिनेंट जनरल(रि.) हुड्डा ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन को सार्वजनिक किया गया, यह सरकार का फैसला था, लेकिन मेरा मानना है कि इस ऑपरेशन का अब राजनीतिकरण ठीक नहीं है। सेना बहुत से ऑपरेशन करती रहती है, लेकिन इन सैन्य अभियानों का इस्तेमाल यदि राजनीतिक फायदा लेने के लिए किया जाए, तो ये देश और सेना दोनों के लिए उचित नहीं है। राजनीतिक और आर्मी के मुद्दों को अलग-अलग ही रखना बेहतर होगा।
उन्होंने कहा कि सभी सैन्य ऑपरेशन्स को सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं होती, लेकिन इस ऑपरेशन की परिस्थितियों ऐसी थी कि इसे सार्वजनिक करना पड़ा। क्या केंद्र सरकार इस ऑपरेशन के लिए राजी थी, इस सवाल के जवाब में लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा ने कहा कि सैन्य अभियानों को चलाना आर्मी का फैसला होता है, लेकिन इस तरह के बड़े अभियानों पर मुहर देश के प्रधानमंत्री ही लगाते हैं। मुहर लगने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है।