अपनी फोर्स अपनी करेंसी, अपनी बिजली, अपना अनाज, अपना फिल्म स्टूडियो... देखिए कुछ ऐसा ही है राम रहीम का डेरा।
कहने को तो डेरा सच्चा सौदा सिरसा जिले में है पर उसकी अपनी ही अलग सल्तनत थी। आधुनिकता की पटरी पर डेरा तेजी से आगे बढ़ रहा था। वहां पर सब कुछ था। सुई से लेकर हवाई जहाज तक बनाने की तैयारी थी। उत्तर भारत का सबसे बड़ा फिल्म स्टूडियों स्थापित किया जा चुका था।
जहां 15 दिन में फिल्म तैयार कर एक रिकार्ड कायम किया गया। ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कमेटियां समन्वय स्थापित करने का कार्य करती थीं। डेरा के अंदर मंत्रालय की भांति विभाग स्थापित किए गए थे। हर विभाग एक एक पाई का हिसाब रखता था।
सिरसा में स्थापित किया सच्चा सौदा
गांव कोटड़ा तहसील गंधे, जिला कोलायत (बिलोचिस्तान) में बेपरवाह शाह मस्ताना महाराज का जन्म हुआ। इनके पिता पिल्लामल गांव में हलवाई की दुकान किया करते थे। माता तुलसां बाई आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाली महिला थीं। सावन शाह साईं महाराज ने एक दिन शाह मस्ताना बिलोचिस्तानी को बुलाया और कहा कहा जाओ और हरियाणा इलाके में मालिक के नाम का डंका बजाओ।
इस पर मस्ताना महाराज कहने लगे, यह अनपढ़ बाड़ी है। वे सिंधी भाषा बोलते हैं। वहां बागड़ी, हिंदी, पंजाबी लोगों को तो उनकी समझ ही नहीं आएगी। सावण शाह महाराज ने कहा कि मस्ताना शाह तेरी आवाज ही खुदा की आवाज होगी। ऐसे में रूहानियत की बेशुमार बख्शीशें लेकर शाह मस्ताना महाराज सिरसा आए और 29 अप्रैल सन् 1948 को बेगू रोड के एक निर्जन इलाके में एक कुटिया के रूप में डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की।