इराक से सरजमीं पर कदम रखते ही छलकीं आंखें
पासपोर्ट छीनकर इराक से दुबई के रास्ते आठ पंजाबी युवक आखिरकार बुधवार को वतन लौट आए। युवकों को वहां से निकलने में एक जर्मन नागरिक ने मदद की।
इराक से सरजमीं पर कदम रखते ही छलकीं आंखें
युवकों को वहां से निकलने में एक जर्मन नागरिक ने मदद की। जर्मनी नागरिक के प्रोत्साहित करने पर ही पंजाबी युवक अपने पासपोर्ट वहां की कंपनी के अधिकारी से वापस छीन सके। इसके बाद सभी शारजाह होते हुए अहमदाबाद हवाई अड्डे पहुंच गए।
इराक से सरजमीं पर कदम रखते ही छलकीं आंखें
वहां से लौटे युवाओं के शरीर पर मौजूद निशान बता रहे थे कि उनके साथ वहां किस हद तक बर्बर सलूक किया जाता था। खाना मांगने पर उन्हें लोहे की रॉड से पीटा जाता था।
इराक से सरजमीं पर कदम रखते ही छलकीं आंखें
जालंधर स्टेशन पर पहुंचे युवकों ने बताया कि इराक की कंपनी जीएमएस ने उन्हें 850 अन्य साथियों के साथ एक कैंप में रखा हुआ था। वहां पेट भर खाना नहीं मिलता था और तीस घंटे तक काम लिया जाता था।
इराक से सरजमीं पर कदम रखते ही छलकीं आंखें
वतन लौटे युवा विनोद कुमार पुत्र देस राज निवासी पंडोरी ढक्क, फगवाड़ा ने बताया कि अब भी कंपनी में करीब 700 युवा फंसे हुए हैं। उनसे जबरन काम लिया जाता है।