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कैंसर के मरीज खुद कर सकेंगे कीमोथैरेपी और नहीं झड़ेंगे बाल, मिला ऐसा फार्मूला...जो बेहद फायदेमंद
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 13 Dec 2018 11:43 AM IST
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cancer patient
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कैंसर के मरीज ध्यान दें, बीमारी के चलते अब वे खुद घर बैठे अपनी कीमोथैरेपी कर सकेंगे। न बाल झड़ेंगे और न ही स्किन काली पड़ेगी। खूबसूरती पर दाग नहीं लगेगा, नाखून भी पीले नहीं होंगे। क्योंकि एक गजब का फॉर्मूला खोज निकाला गया है, जो बेहद फायदेमंद है।
कैंसर टेस्ट
पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के फार्मास्युटिकल साइंस विभाग के प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह भूप के निर्देशन में नौ वैज्ञानिकों ने यह नैनो फार्मूला तैयार किया है। कन्वर्ट ड्रग डिलीवरी अप्रोच व प्लांट बायो एक्टिव के जरिये बाजार में उपलब्ध एंटी कैंसर इंजेक्शन को टैबलेट में कन्वर्ट किया गया है जो सीधे ट्यूमर पर ही काम करेगी। शरीर के अन्य हिस्सों पर उसका प्रभाव नहीं होगा। छह साल तक चले रिसर्च में इन वैज्ञानिकों की टीम ने एनिमल स्टडी पूरी कर ली है। अब ह्यूमन स्टडी होगी। इसका काम फार्मा कंपनियां करेंगी। माना जा रहा है कि एक से दो साल में यह पूरा फार्मूला बाजार में होगा।
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- फोटो : File Photo
कौन-कौन था रिसर्च में शामिल
पंजाब विश्वविद्यालय के फार्मास्युटिकल साइंस विभाग के प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह भूप के अलावा डॉ. रजनीत कौर, डॉ. प्रेमजीत सिंह, रविंद्र कौर, टीनू शर्मा, अतुल जैन, राजप्रीत कौर आदि वैज्ञानिकों ने बाजार में उपलब्ध कैंसर कीमोथैरेपी के इंजेक्शन डोसिटेक्सिल, पेक्लिटेक्सिल आदि को नैनो विधि से पाउडर में बदला। टैबलेट तैयार कर उसेड्रग डिलीवरी अप्रोच की सहायता से चूहे को दी गई। इसमें प्लांट बायो एक्टिव के जरिए मेंगीफेरिन, क्यूरेसिटिन, क्रिएशिन, नरेंगेनिन आदि का भी समावेश किया गया।
पंजाब विश्वविद्यालय के फार्मास्युटिकल साइंस विभाग के प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह भूप के अलावा डॉ. रजनीत कौर, डॉ. प्रेमजीत सिंह, रविंद्र कौर, टीनू शर्मा, अतुल जैन, राजप्रीत कौर आदि वैज्ञानिकों ने बाजार में उपलब्ध कैंसर कीमोथैरेपी के इंजेक्शन डोसिटेक्सिल, पेक्लिटेक्सिल आदि को नैनो विधि से पाउडर में बदला। टैबलेट तैयार कर उसेड्रग डिलीवरी अप्रोच की सहायता से चूहे को दी गई। इसमें प्लांट बायो एक्टिव के जरिए मेंगीफेरिन, क्यूरेसिटिन, क्रिएशिन, नरेंगेनिन आदि का भी समावेश किया गया।
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Cancer treatment
कुछ दिनों बाद रिजल्ट सामने आए तो पता चला कि चूहे के कैंसर वाले भाग पर दवा अधिक कारगर हुई और शरीर पर साइड इफेक्ट भी नहीं हुए। इस रिसर्च में यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल लेंकासिरे यूके, ट्रिपल आईएम जम्मू, फार्मा इंडस्ट्री पीजीआई, निपर, इमटैक चंडीगढ़ की भी मदद ली गई। दिन-प्रतिदिन वैज्ञानिकों को परिणाम बेहतर मिलने लगे। छह साल बाद वैज्ञानिकों ने घोषित कर दिया कि एनीमल स्टडी पर दवा पूरी तरह कारगर है। अब फार्मा कंपनियां मानव स्टडी कर इसे बाजार में उतारेंगी। बाजार में तीन एमएल इंजेक्शन की कीमत 17 हजार रुपये है। इस नए फार्मूले से पांच से छह हजार में टैबलेट उपलब्ध होगी।
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Doctor
- फोटो : डेमो
‘बाजार में उपलब्ध एंटी कैंसर की दवाओं की डोज कम करके उसे नैनो फार्मूले से अधिक प्रभावी बनाया गया है। इससे टैबलेट तैयार हो सकेंगी, जिनकी कीमत भी काफी कम होगी। इसके जरिये कीमोथैरेपी घर पर ही हो सकेगी। इसके साइड इफेक्ट नहीं होंगे। इस फार्मूले से एनीमल पर स्टडी पूरी हो गई है। अब मानव स्टडी पर फार्मा कंपनियां काम शुरू करेंगी। पंजाब विश्वविद्यालय के लिए यह बड़ी उपलब्धि है।’
- प्रो. भूपेंद्र सिंह भूप, यूनिवर्सिटी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
- प्रो. भूपेंद्र सिंह भूप, यूनिवर्सिटी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़