किन्नरों की दुनिया अलग तरह की होती है, जिसके बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है। आइए हम आपके बताते हैं, उनकी दर्दभरी जिंदगी के कुछ कड़वे सच।
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किन्नरों के साथ DJ पर जमकर थिरके हजारों स्टूडेंट्स
मौका था पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में आयोजित किए दो दिवसीय गर्वोत्सव-2017 का। पिछले आठ साल से आईजीबीटी के हकों के लिए लड़ रहे दिल्ली के वकील आदित्य बंदोपाध्याय ने किन्नरों पर चर्चा की। इनके साथ ही पीयू में पढ़ाई कर रहे एक किन्नर स्टूडेंट धनंजय ने भी अपने विचार रखे। खास बात यह रही कि इस दौरान कई चौंकाने वाली बातें खुलकर सामने आई।
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किन्नरों के साथ DJ पर जमकर थिरके हजारों स्टूडेंट्स
धनंजय पीयू में ह्यूमन राइट्स में एमए कर रहीं हैं। चर्चा के दौरान ने कहा कि यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी और एडमिशन मिल गया। वे बताते हैं कि हमें घरों से भगा दिया जाता है। हम कहीं से भी गुजरे लोग हमें ऐसे देखते हैं जैसे हमने कोई गुनाह कर दिया हो। हमें किराए पर रहने के लिए घर नहीं मिलते। मजबूरन में डेरों या सराओं में रहना पड़ता है।
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किन्नरों के साथ DJ पर जमकर थिरके हजारों स्टूडेंट्स
धनंजय ने बताया कि भारत में बीस लाख से ज्यादा किन्नर है और निरंतर इनकी संख्या घट रही है। फिर भी हिजड़े को संतान मिल ही जाती है। वे उनका लालन-पालन बड़े अच्छे ढंग से करते हैं। जहां तक एक से बच्चे को बिरादरी में सम्मिलित करने की बात है तो बनी प्रथा के अनुसार बालिग होने पर ही रीति संस्कार द्वारा किसी को बिरादरी में शामिल किया जाता है।
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किन्नरों के साथ DJ पर जमकर थिरके हजारों स्टूडेंट्स
रीति संस्कार से एक दिन पूर्व नाच गाना होता है तथा सभी का खाना एक ही चुल्हे पर बनता है। अगले दिन जिसे किन्नदर बनना होता है, उसे नहला-धुलाकर अगरबत्ती और इत्र की सुगंध के साथ तिलक किया जाता है। शुद्धिकरण उपरांत उसे सम्मानपूर्वक ऊंचे मंच पर बिठाकर उसकी जननेन्द्रिय काट दी जाती है और उसे हमेशा के लिए साड़ी, गहने व चूड़ियां पहनाकर नया नाम देकर बिरादरी में शामिल कर लिया जाता है।