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शहीद सैनिकों के हकों को लेकर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जान ले हर कोई

Mon, 19 Feb 2018 10:02 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 19 Feb 2018 10:02 AM IST
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punjab haryana highcourt decision in favour of indian army martyr soldiers rights
भारतीय सैनिक
शहीद सैनिकों के हकों को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा ही ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसे जानना हर किसी के लिए जरूरी है। क्लिक करके देखिए...
punjab haryana highcourt decision in favour of indian army martyr soldiers rights
indian army - फोटो : BASIT ZARGAR
युद्ध संभावित क्षेत्र में जवान शहीद हुआ, भले ही कोई हमला हो या पेट्रोलिंग के दौरान हादसे से। शहीद तो शहीद ही है आखिर मौजूद तो वह देश की रक्षा के लिए ही था। ऐसे में उसे उसका हक देना राज्य सरकार का धर्म बनता है। यह टिप्पणी करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से सैनिक के परिजनों को एक्सग्रेशिया का लाभ देने के सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

 
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indian army
रीता सैकिया ने एडवोकेट अरुण सिंगला के माध्यम से सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उसके पति 22 अप्रैल 2008 से 11 अगस्त 2010 तक भारत सरकार के ऑपरेशन रक्षक के तहत जम्मू कश्मीर में बॉर्डर पर युद्ध संभावित क्षेत्र में तैनात थे। 11 अगस्त की रात को भारी बारिश के दौरान वे पेट्रोलिंग ड्यूटी पर थे और इस दौरान बारिश के चलते बंकर गिर गया और उसके पति शहीद हो गए।
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इसके बाद सेना की ओर से उन्हें फैमिली पेंशन आरंभ कर दी गई, जिसे आर्म फोर्स ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई। ट्रिब्यूनल ने उनके हक में फैसला सुनाते हुए शहीद पेंशन के लिए हकदार माना था। इसके बाद परिजनों ने हरियाणा सरकार की युद्ध क्षेत्र में शहीद होने वालों के लिए बनाई गई 10 लाख की एक्सग्रेशिया ग्रांट के लिए आवेदन किया। हरियाणा सरकार ने इसे यह कहते हुए इनकार कर दिया कि दिलीप की मौत न तो किसी आतंकी हमले में हुई है और न ही किसी ब्लास्ट में।
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बंकर में सोते हुए बंकर गिरने से हुई मौत के लिए इस ग्रांट को जारी नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के जस्टिस एमएमएस बेदी ने हरियाणा सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि पीड़ित परिवार इस ग्रांट का हकदार है और ऐसे में हरियाणा सरकार 3 माह के भीतर इस ग्रांट को जारी करे। इस फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार ने अपील दाखिल की थी। अपील में देरी होने के चलते पहले इस देरी की माफी के लिए अर्जी दाखिल की थी।
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