लड़की को 'सच का आईना' दिखाने की सजा मिल रही है और ऐसा भारत देश में ही हो सकता है। मामला पीएम मोदी से जुड़ा है, जानिए।
दरअसल, 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में बदइंतजामी की पोल खोलने वाली दिव्यांग खिलाड़ी सुवर्णा को सोमवार को खेलने नहीं दिया गया। सुवर्णा का आरोप है कि पैरा ओलंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) के अधिकारियों ने उन्हें जानबूझकर खेलने नहीं दिया, क्योंकि उन्होंने अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई थी।
हालांकि पीसीआई हरियाणा के महासचिव गिरीराज ने सुवर्णा के आरोपों को सिरे से नकारते हुए आरोप लगाया कि सुवर्णा दूसरी एसोसिएशन से संबंधित होने के कारण खिलाड़ियों का नुकसान करना चाहती हैं। दरअसल, सुवर्णा का जैवलिन थ्रो का मुकाबला सोमवार को होना था लेकिन शाम तक उनका नंबर ही नहीं आया।
शाम को जब उन्होंने अधिकारियों से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कह दिया कि आपका मुकाबला नहीं होगा। इससे नाराज होकर खेल मैदान से सुवर्णा वापस आ गईं। उन्होंने कहा कि अब वह वापस अपने घर जा रही हैं। सुवर्णा ने आरोप लगाया कि आयोजन के दौरान अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें खेलने नहीं दिया गया।
उन्होंने फिर कहा कि पंचकूला में आयोजित पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में कई खामियां हैं, जिनको देखकर मुझे 2015-16 के गाजियाबाद के टूर्नामेंट की याद आ गई। आयोजकों ने फर्श पर 300-400 गद्दे बिछा दिए हैं और एक-एक कमरे में दर्जनों लड़कियां हैं। 100 लड़कियों को सिर्फ एक ही बाथरूम दिया गया है, जहां पर व्हीलचेयर को ले जाना मुश्किल है। आयोजन के पहले दिन ही लड़कियां बाथरूम में घुसने के लिए एक-दूसरे से लड़ती रहीं।