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पराली नहीं, कमाई: हरियाणा में फसल अवशेष से खड़ा हुआ 200 करोड़ का कारोबार, हजारों को रोजगार

Thu, 01 Oct 2026 03:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण शर्मा, चंडीगढ़
अरुण शर्मा, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 01 Oct 2026 03:37 AM IST
सार

पराली प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की पहल और किसानों की सोच में आए बदलाव से राज्य में पराली का अनुमानित करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा हो गया है। राज्य में करीब 200 एग्रीगेटर्स पराली प्रबंधन के काम में जुटे हुए हैं।

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Not Stubble, but Earnings: A ₹200-Crore Business Built on Crop Residue in Haryana
राज्य के मेवात, गुरुग्राम, उत्तर प्रदेश के बिजनौर, राजस्थान, दिल्ली के कई जिलों में चारे को भेजा जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में पराली किसानों के लिए भविष्य के सुनहरे सोने के रूप में उभरी है। पराली प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की पहल और किसानों की सोच में आए बदलाव से राज्य में पराली का अनुमानित करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा हो गया है। राज्य में करीब 200 एग्रीगेटर्स पराली प्रबंधन के काम में जुटे हुए हैं। इनके अतिरिक्त ट्रैक्टर-ट्रॉली, बेलर मशीन आदि उपकरणों से जुड़े करीब 1000 लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। पराली प्रबंधन में हजारों मजदूरों और ट्रांसपोर्टरों को भी काम मिल रहा है।

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सिरसा के एग्रीगेटर्स कृष्ण का कहना है कि पराली को खेतों से 25 किलो की गांठ बनाकर गैस, बिजली व अन्य कंपनियों तक भेजने के कार्य में नया रोजगार मिला है। बिजली उत्पादन व बायोफ्यूल वाले प्लांट में 180 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पराली बेची जा रही है। रोहतक के संदीप का कहना है कि सर्दियों में पराली का चारे के लिए उपयोग सर्वाधिक होता है। राज्य के मेवात, गुरुग्राम, उत्तर प्रदेश के बिजनौर, राजस्थान, दिल्ली के कई जिलों में चारे को भेजा जाता है। 
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चारे के रूप में पराली की 350 रुपये से लेकर 400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक्री हो रही है। राज्य में पराली से चारे के कार्य में करीब 800 लोग मशीनों, ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ लगे हुए हैं। इन क्षेत्रों की गोशालाओं में चारे की भी बड़ी मांग है। कुरुक्षेत्र स्थित बजगामा गांव के किसान अमीर सिंह का कहना है कि पिछले वर्ष तक किसानों को दूसरी फसलों की तैयारी के लिए खेतों को खाली करने की जल्दी होती थी। इसलिए पराली की गांठ बनाने वाले प्रति एकड़ 500 रुपये शुल्क ले लेते थे मगर पराली की मांग बढ़ने से इस बार कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
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विशेषज्ञ बोले - पराली भविष्य का सुनहरा सोना
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त अभियंता महेंद्र शर्मा का कहना है कि पराली का पहले निस्तारण करना किसानों के लिए बेहद मेहनत वाला और अधिक लागत वाला कार्य होता था। अब पराली का बायोफ्यूल, गैस, बिजली के उत्पादक प्लांट में उपयोग हो रहा है। पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली में पराली से तैयार चारे की मांग बढ़ी है। 


यमुनानगर में पराली जलाने पर तीन भाइयों के खिलाफ प्राथमिकी
यमुनानगर। यमुनानगर में सीजन में पराली जलाने का पहला मामला सामने आया है। थाना छप्पर क्षेत्र के गांव मंधार में खेत में पराली जलाने के आरोप में तीन सगे भाइयों हरजीत सिंह, ओंकार सिंह व अवतार सिंह के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। 

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