गर्मी में पपीता काफी फायदेमंद है, लेकिन अगर आप ये वाला पपीता खाएंगे तो खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में आम या पपीता खरीदते समय सही की पहचान कर सकते हैं।
दरअसल, कच्चे फलों को पकाने में फल विक्रेता अब नए-नए तरीके अपनाने लगे हैं। दो बार मारे गए छापे में पता चला कि आम व चीकू को पकाने में चाइजीन पुड़िया (इथिलिन) व इथिलिन गैस का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह केमिकल का एक विशेष मिश्रण है। फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट इसे लेकर थोड़ा असमंजस में है। फूड सेफ्टी रेग्युलेशन के मुताबिक एक किलोग्राम फल में तीन मिलीग्राम इथिलिन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
विभाग ने इसे इकट्ठा कर दिल्ली हेड आफिस में भेजा है, ताकि पता लगाया जा सके कि यह स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है और पकड़े जाने पर क्या कार्रवाई की जाए। जांच में यह पता चला कि पुड़िया बाहर किसी शहर से सप्लाई की जा रही है। फल विक्रेता इसे चाइनीज पुड़िया कहते हैं। असल में इसमें इथिलिन है। कुछ विक्रेता इसका इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुछ इथिलिन गैस का।
जांच टीम को इथिलिन गैस के कुछ स्प्रे भी मिले हैं, जिन्हें दिल्ली भेजा जा रहा है। जांच टीम के सदस्यों ने देखा है कि कच्चे आम में पुड़िया रख देते हैं और इसी से पकाते हैं। मंडी में फल विक्रेता दो बार पपीते को कैल्शियम कर्बाइड से पकाते धरे गए हैं। एक बार ढाई टन और दूसरी बार पांच टन। विभाग ने इन पपीतों को डंपिंग ग्राउंड में डंप कर दिया है।
हालांकि फूड इंस्पेक्टरों को शक था कि केले को भी कैल्शियम कर्बाइड से पकाया जा रहा होगा, लेकिन ऐसा मिला नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां से फलों की सप्लाई होती है, वहां पर केमिकल या इथिलिन नहीं डाला जाता। जब फल चंडीगढ़ पहुंचते हैं तो यहीं पर पकाने का काम होता है। लोगों को यदि स्वच्छ फल खरीदने हैं तो सुबह छह बजे के आसपास मंडी पहुंचें और फल खरीदें। उस दौरान जो भी फल मिलेंगे वे ताजे और स्वच्छ होंगे।