गुरुद्वारा पहली पातशाही में मलबे में दबे यमुनानगर निवासी पाठी देवेंद्र सिंह का शव करीब 36 घंटे बाद बुधवार तड़के करीब सवा चार बजे निकाल लिया गया।
2 of 8
Panipat gurdwara's roof collapses
शव गुरुद्वारे के छोटे गेट के नजदीक करीब आठ फुट अंदर दो लेंटरों के बीच में मिला। उनकी पहचान हरे रंग की कमीज से हुई। इसके साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या पांच हो गई है। एनडीआरएफ ने देवेंद्र सिंह का शव निकालने के बाद पूरे गुरुद्वारे में सर्च अभियान चलाया। इस दौरान किसी अन्य के दबे होने के कोई संकेत नहीं मिले। इसके बाद रेसक्यू ऑपरेशन बंद कर दिया गया।
3 of 8
Panipat gurdwara's roof collapses
एनडीआरएफ के हटने के बाद प्रशासन ने गुरुद्वारा को अपने कब्जे में ले लिया और दोनों गेटों पर ताले लगा दिए। गुरुद्वारा मार्केट लगातार तीसरे दिन बंद रहा। दुकानदारों ने कुछ देर वहीं बैठकर रोष प्रकट किया। एचएसजीपीसी के प्रधान ने गुरुद्वारा गिरने के मामले को एलिवेटिड हाईवे बनाने में बरती लापरवाही को कारण बताकर नया इश्यू खड़ा कर दिया। पुलिस ने तीन शवों के पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिए।
जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा पहली पातशाही में सोमवार शाम से शुरू ऑपरेशन रेस्क्यू बुधवार सुबह तक चलता रहा। मंगलवार रात को करीब साढ़े सात बजे सेवादार दर्शन सिंह का शव मिलने के बाद पाठी देवेंद्र सिंह की तलाश तेज कर दी। टीम को देर रात को करीब 11 बजे देवेंद्र सिंह की हरे रंग की कमीज दिखाई दी। वह दो लेंटरों के बीच में फंसा हुआ था।
5 of 8
Panipat gurdwara's roof collapses
एनडीआरएफ की टीम ने लेंटरों को काटने का भी प्रयास किया, लेकिन वे गुंबद के बार-बार हिलने की वजह से उसे काट नहीं सके। एनडीआरएफ की टीम ने दोनों लेंटरों के बीच में जैक लगाया और तड़के करीब सवा चार बजे देवेंद्र सिंह को बाहर निकाला। डॉक्टरों ने जांच के बाद देवेंद्र सिंह निवासी यमुनानगर को मृत घोषित कर दिया।