मौत का अजब खेलः सुबह उठे तो जा चुकी थी बरात, लौटे तो हादसे ने लील ली छह की जान
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हादसे से पहले सुबह करीब पांच बजे दूल्हा सुनील अपनी दुल्हन को लेकर अपने गांव चूली खुर्द पहुंच गया। सोमवार को कर्मवीर के बेटे प्रवीन की बरात जानी थी। उनकी बेटी अपने भाई की बरात जाते देखे और दामाद सुनील भी बरात में शामिल हो सके, इसकी तैयारियां साथ ही शुरू हो गई थीं, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
करीब सवा आठ बजे हादसे की सूचना मिलकपुर व चूली खुर्द पहुंची तो परिजनों की सारी खुशियां मातम में बदल गईं। चूली खुर्द से सभी बराती वापस चल पड़े और मिलकपुर के सैकड़ों ग्रामीण भी घटनास्थल पर पहुंच गए। हादसे के बाद गमगीन माहौल में रस्म अदायगी के लिए मिलकपुर से प्रवीन की बरात करीब 11 बजे केवल पांच लोगों के साथ ही रवाना हुई।
कस्बे के मिलकपुर गांव निवासी कर्मवीर की बेटी की रविवार को शादी थी। फेरे हो गए और बरात विदा हो गई, लेकिन दूल्हे के राजस्थान निवासी भातियों को कालचक्र ने गांव में ही रोक लिया था। कुल 11 लोग शादी कार्यक्रम के दौरान गांव में एक कमरे में जाकर सो गए। सुबह उठे तो पता चला कि बरात विदा हो चुकी है। इस पर गांव का ही दिनेश अपनी ईको वैन में उन्हें छोड़ने निकला था, जिनमें से छह लोगों का काल बीच रास्ते उनका इंतजार कर रहा था।
भयानक था हादसा, खिड़कियों को तोड़कर घायलों को बाहर निकाला
हादसा इतना भयानक और दर्दनाक था कि उसे देखते ही उसकी भयावह स्थिति का पता लग रहा था। मौके पर छह लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि घायलों की हालत भी काफी चिंताजनक थी। राहगीरों ने खिड़कियों को तोड़कर घायलों को बाहर निकाला।
घटना के चश्मदीद बोले
मैं सिरसा जिले के गांव सुचान में जेबीटी अध्यापक हूं। सोमवार को अपने गांव गामड़ा से करीब साढ़े सात बजे ड्यूटी पर जाने को निकला था। जिस गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ, वह बिलकुल मेरी गाड़ी के आगे चल रही थी। थोड़ा आगे गाड़ी अचानक डंपर में जा घुसी। मेरे साथ दो लोग और थे। हमने एक स्कूल बस व अन्य वाहनों को रुकवाया और गाड़ी को पीछे धकेलकर घायलों को बाहर निकलना शुरू किया। - नरेंद्र गामड़ा, चश्मदीद
कुछ देर पहले घटनास्थल से गुजरा था, लौटा तो हादसा हुआ देखा
मैं सुबह किसी काम से खेड़ी चौपटा गया था। करीब 7:45 बजे जब वापस आ रहा था तो हादसा हो चुका था। उस समय वहां पर करीब 15-16 लोग एकत्रित थे। हमने डंपर में फंसी गाड़ी को पीछे धकेला। जब घायलों को बाहर निकालना चाहा तो गाड़ी की कोई भी खिड़की नहीं खुली। उसके बाद स्कूल बस और ट्रकों से रॉड लेकर खिड़कियां तोड़कर घायलों को गाड़ी से बाहर निकाला और घटना की सूचना पुलिस व एंबुलेंस को दी। - रविंद्र उर्फ काला, राखी शाहपुर
दो धमाकों की आवाज सुनी
हादसे की जगह के सामने ही मैं खेतों में रहता हूं। सुबह करीब साढ़े छह बजे धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसको सुनकर मैं रोड पर पहुंचा तो डंपर रोड पर खड़ा था। उसका टायर फट गया था और चालक टायर बदलने की तैयारी में था। उसके बाद करीब साढ़े सात व पौने आठ बजे के बीच फिर एक जोरदार धमाके की आवाज सुनकर सड़क पर गया तो देखा कि उसी डंपर में एक ईको गाड़ी पीछे से घुस गई थी। कुछ ही समय में लोग वहां एकत्रित हो गए और घायलों को निकालकर अस्पताल भिजवाने लगे। - दयानंद, राखी शाहपुर निवासी
मैं चालक के पीछे वाली सीट पर बैठा था, धुंध भी छायी थी
मैं चालक वाली सीट के ठीक पीछे गाड़ी की बीच वाली सीट पर बैठा हुआ था। मेरे साथ विक्रम और कुलदीप व भूपेंद्र बैठे हुए थे। मेरा ध्यान आगे नहीं था, लेकिन धुंध भी थी। हम बातें कर रहे थे, अचानक हादसा हुआ लेकिन कैसे और क्यों हुआ, इसका पता ही नहीं चला। - घायल रोहताश, हंतपुरा निवासी
घायल बोला - सुनील से दोस्ती के चलते आया था बरात में
सुनील मेरा दोस्त है, जिसके चलते मैं बरात में आया हुआ था। बरात में पहुंचने के बाद खाना खाकर हम 11 लोग एक मकान में जाकर सो गए। सुबह उठे तो पता चला कि बरात के लोग जा चुके हैं और हम यहीं पर रह गए हैं। हमें चूली खुर्द छोड़ने के लिए एक गाड़ी दे दी गई। जब हम वहां से चले तो कुछ दूर जाकर घटना हो गई। मैं गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा हुआ था। मेरा आगे ध्यान नहीं था, जिसके कारण इस बात का नहीं पता कि एक्सीडेंट क्यों हो गया। - श्रवण कुमार, घायल
घर में अकेला कमाने वाला था चालक दिनेश, दो बच्चों की परवरिश पर संकट
मृतकों में शामिल कस्बे के मिलकपुर निवासी ईको वैन चालक 34 वर्षीय दिनेश उर्फ सन्नी घर में अकेला कमाने वाला था और उसके कमाने का साधन यह गाड़ी ही थी। उसकी मां की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार में पत्नी, 10 साल का बेटा और छह साल की बेटी रह गए हैं।
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी तहसील के गांव शीलवाला कलां निवासी 65 वर्षीय सोहन लाल खेतीबाड़ी करता था। 49 वर्षीय ओमप्रकाश गाड़ी चलाता था। 19 वर्षीय सचिन 12वीं कक्षा पास कर बीए प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रहा था। 28 वर्षीय कुलदीप खेतीबाड़ी कर अपने पिता का हाथ बंटा रहा था। 33 वर्षीय भूपेंद्र सिंह भी गाड़ी चलाता था। उसके दो बच्चे व पत्नी है और घर में अकेला ही कमाने वाला था।