देखिए हॉकी चैम्पियन इन तीन भाइयों को, दास्तां चौंका देगी
हॉकी के इन चैम्पियन तीन भाइयो को देखिए। इनकी दर्दभरी दास्तां खेलों के तीमारदारों के मुंह पर एक तमाचा है। तस्वीरों में पढ़िए कहानी। रिपोर्टः मोहित धूपड़, अंबाला कैंट
देखिए हॉकी चैम्पियन इन तीन भाइयों को, दास्तां चौंका देगी
ये तीनों भाई हरियाणा में अंबाला कैंट के रहने वाले हैं। इन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल हॉकी को दिए। जिला स्तर से लेकर नेशनल स्तर तक हॉकी में बुलंदी को छुआ। एक चैंपियन की तरह खेलते हुए कई मेडल और खिताब जीते। स्पोर्ट्स कोटे तहत रेलवे व अन्य महकमों में नौकरी का आवेदन भी किया, लेकिन ठोस सिफारिश न होने की वजह से तीनों को नौकरी नहीं दी गई।
देखिए हॉकी चैम्पियन इन तीन भाइयों को, दास्तां चौंका देगी
आज ये तीनों परिवार का पालन पोषण करने के लिए अपने-अपने तरीके से रोजगार का साधन ढूंढ लिया। इन तीनों हॉकी चैंपियन भाइयों में से सबसे छोटा भाई तारा सिंह रेलवे स्टेशन पर कुली बन गया है। जबकि मंझला भाई तलविंद्र सिंह और सबसे बड़ा भाई बजिंद्र आज ऑटो रिक्शा चलाते हैं, लेकिन इनके दिलों में एक टीस बाकी है।
देखिए हॉकी चैम्पियन इन तीन भाइयों को, दास्तां चौंका देगी
तीनों का कहना है कि असल जिंदगी में सरकारी सिस्टम ने उन्हें हरा दिया, लेकिन उन्होंने अभी भी हार नहीं मानी है। तीनों भाई आज भी शाम को फरुखा खालसा के हॉकी मैदान में स्कूल की प्राइवेट कोचिंग में हॉकी को पूरा समय देते हैं। इतना ही नहीं तलविंद्र ने अपने 12 साल के बेटे प्रीत सिंह मोंटी और बजिंद्र सिंह ने अपने 13 साल के बेटे गगनदीप सिंह के हाथ में भी हॉकी स्टीक पकड़ा दी है।
देखिए हॉकी चैम्पियन इन तीन भाइयों को, दास्तां चौंका देगी
तीनों भाई मैदान में दूसरे बच्चों के साथ-साथ अपने बच्चों को भी हॉकी का धुरंधर बनाने के जुनून में जुट चुके हैं। तीनों का कहना है कि सरकार भी हॉकी की ओर ध्यान नहीं दे रही है। जिसका उदाहरण है कि जिस शहर से खेल मंत्री हैं, वहीं हॉकी का कोई कोच ही खेल विभाग के पास नहीं है।