स्कूल में हुए एक प्रदर्शनी कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने अपनी कला से सभी का मन मोह लिया। हजारों वर्ष पुरानी वीरान सभ्यता में जब उन्होंने हुनर का रंग भरे तो वो जीवांत हो उठी।
चंडीगढ़ स्थित सॉपिंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-32 की ओर से इनदिनों मिस्र की सभ्यता को खूबसूरत एग्जीबिशन मिस सभ्यता अलाइव के नाम से प्रदर्शित किया जा रहा है। यह एग्जीबिशन चार अगस्त तक जारी रहेगी।
इसमें स्कूल के विद्यार्थियों ने मिस्र की अद्भुत कला एवं सभ्यता को अपने खूबसूरत मॉडल के जरिए दर्शाया है। एग्जीबिशन में गीजा पिरामिड परिसर और महान स्फिंक्स जैसे प्रसिद्ध स्मारक से लेकर प्राचीन खंडहर जैसे मेम्फिस, थेबिस, करनाक और राजाओं की घाटी को दिखाया गया है।
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बच्चों द्वारा तैयार प्राचीन मिस्र के मॉडल
गौरतलब है कि मिस्र हमेशा से ही विशेषज्ञों के लिए पुरातात्विक अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा हैं। यहां के शासक को फारो नाम से जाना जाता था। इस पदवी का प्रयोग ईसाई और इस्लाम काल के पूर्व काल में होता था। इसे फारोह भी लिखते हैं।
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प्रदर्शनी में मौजूद छात्राएं
फारो को मिस्र के देवता होरसका पुनर्जन्म माना जाता था। होरस द्यौ (आकाश) का देवता था और इसे सूर्य भी माना जाता था। इस एग्जीबिशन में विद्यार्थियों ने अपनी कलेक्शन के जरिए खूब वाहवाही बटोरी है।