ऑपरेशन ब्लू स्टार एक ऐेसे गुरुद्वारे में अंजाम दिया गया था, जिसके नाम में मंदिर आता है और जिसकी नींव एक मुसलमान ने रखी थी, चौंक गए न जानकर।
पंजाब के अमृतसर में बना श्री हरिमन्दिर साहिब गुरुद्वारा यानी स्थित स्वर्ण मंदिर में सिखों का पवित्र स्थल है। न केवल सिखों की, बल्कि लोगों की इसमें अटूट आस्था है। यही कारण है कि जब 6 जून 1984 को यहां खून खराबा हुआ। 492 लोगों और 83 जवानों की जान गई तो सिखों की आस्था को गहरी ठेस पहुंची।
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पंजाब के अमृतसर में स्थित गुरुद्वारा श्री हरिमन्दिर साहिब
स्वर्ण मंदिर की नींव मुसलमान पीर सूफी संत साईं मिया मीर ने रखी थी। इसका पूरा उल्लेख स्वर्ण मंदिर में लगे शिलालेखों से पता चलता है। सूफी संत साईं मिया मीर का सिख धर्म के प्रति शुरू से ही झुकाव था। वे लाहौर के रहने वाले थे और सिक्खों के पांचवें सिख गुरु अर्जन देव जी के दोस्त थे। जब हरिमंदिर साहिब के निर्माण पर विचार किया गया, तो फैसला हुआ था कि इस मंदिर में सभी धर्मों के लोग आ सकेंगे।
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पंजाब के अमृतसर में स्थित गुरुद्वारा श्री हरिमन्दिर साहिब
इसके बाद सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने लाहौर के सूफी संत साईं मियां मीर से दिसंबर 1588 में गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी। पूरा अमृतसर शहर स्वर्ण मंदिर के चारों तरफ बसा हुआ है। अमृतसर का नाम वास्तव में उस सरोवर के नाम पर रखा गया है जिसका निर्माण गुरु राम दास ने स्वयं अपने हाथों से किया था।
लगभग 400 साल पुराने इस गुरुद्वारे का नक्शा खुद गुरु अर्जुन देव जी ने तैयार किया था। यह गुरुद्वारा शिल्प सौंदर्य की अनूठी मिसाल है। इसकी नक्काशी और बाहरी सुंदरता देखते ही बनती है। गुरुद्वारे के चारों ओर दरवाजे हैं, जो चारों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) में खुलते हैं। यहां हर धर्म के अनुयायी का स्वागत किया जाता है। श्री हरिमन्दिर साहिब परिसर में दो बड़े और कई छोटे-छोटे तीर्थस्थल हैं।