जलियांवाला नरसंहार का सच खोलेगी ‘नथिंग बट’
‘नथिंग बट’ में 7 भारतीय परिवारों, एक अंग्रेज परिवार और उनकी पांच पीढ़ियों की कहानी पढ़ने को मिलेगी। ये कभी अच्छे दोस्त हुआ करते थे। हालात ऐसे बन जाते हैं कि वे एक-दूसरे को दुश्मन समझने लग जाते हैं।
जलियांवाला नरसंहार का सच खोलेगी ‘नथिंग बट’
सेक्टर-27 के प्रेस क्लब में ब्रिगेडियर समीर भट्टाचार्य की लिखी इस किताब का विमोचन किया गया। समीर ने बताया कि किताब के माध्यम से दिखाया गया है कि कैसे लोग परिस्थितियों के हाथों मजबूर होकर एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। यह किताब छह भाग में है।
जलियांवाला नरसंहार का सच खोलेगी ‘नथिंग बट’
पुस्तक राजनेताओं के भ्रष्टाचार, घोटालों, भाई-भतीजावाद, चापलूसी, सांप्रदायिकता और सांप्रदायिकता आधारित वोट बैंक की राजनीति जैसे मुद्दों पर भी आधारित है। ‘द अवेकनिंग’ में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती दिनों से लेकर विश्व युद्ध-1 और जलियांवाला बाग नरसंहार का जिक्र है। ‘द लांग रोड टू फ्रीडम’ में युवा स्वतंत्रता सेनानियों और राजनेताओं के जीवन और बलिदान का जिक्र है।
जलियांवाला नरसंहार का सच खोलेगी ‘नथिंग बट’
1971 की जंग, सिख उग्रवाद का भी विस्तार से चित्रण है। ‘ऑल इज फेयर इन लव एंड वार’ में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इस्लामीकरण और वहां इस्लामी कट्टरपन की दास्तां व भारतीय उप-महाद्वीप में आतंकवाद को बढ़ावे के बारे में बताया गया है। ‘फेयरवेल माईलव’ में मुस्लिम सैन्य अधिकारी और हिंदू बंगला लड़की की दर्दनाक प्रेमगाथा है जो नई पहचान के साथ 30 साल के लंबे अंतराल और कश्मीर मुद्दे पर अरसे से चले आ रहे विवाद को थामने और वहां शांति स्थापित करने के प्रयासों के बाद दोबारा मिलते हैं।
जलियांवाला नरसंहार का सच खोलेगी ‘नथिंग बट’
‘व्हाट प्राइस फ्रीडम’ में शरणार्थियों के बदतर हालात की दास्तां बताई गई है। 1947 में मुल्क के बंटवारे के अलावा 1962 और 1965 के युद्धों का भी वर्णन है। ‘लव है जो रिलीजन’ में 1971 में बांग्लादेश के लिए हुई जंग का वर्णन किया गया है। इसमें एक मुस्लिम सैन्य अधिकारी व एक अन्य हिंदू बंगला लड़की समेत दो प्रेमियों की आंखों से देखी गई गाथा है।