अगर आप चेक से लेन देन करते हैं तो आपके लिए ये तीन जानकारिया बड़े काम की हो सकती हैं और नुकसान होने से भी बच जाएगा। देख लीजिए वरना पछताएंगे।
दरअसल, नोटबंदी के बाद से बैंकों में जमा होने वाले चेक की संख्या तीन गुणा बढ़ गई है। ऐसे में चेक के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) ने जिले के सभी बैंकों को चेक ट्रांजेक्शन सिस्टम (सीटीएस) से काम करने के निर्देश दिए हैं। अब चेक क्लीयरिंग के लिए भेजने के बजाय स्कैन करके दिल्ली ग्रिड को भेजे जाएंगे। दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद ही भुगतान होगा।
एनडी डुडेजा, एजीएम, एसबीआई मेन ब्रांच, रोहतक ने बताया कि इस ओटोमेशन पद्धति से चेक क्लीयर होने का कार्य 20 फरवरी से शुरू हो गया था। इसके शुरू होने से बैंक में चेक जमा होने के अगले ही दिन भुगतान हो सकेगा। वहीं, 20 मार्च से नान सीटीएस चेक (पुरानी चेकबुक) अमान्य हो गई हैं। अब खाताधारकों को नई सीटीएस चेक बुक लेनी होगी, किसी दूसरे राज्य के बैंक का चेक नहीं चलेगा।
बता दें कि नोटबंदी के बाद आरबीआई नान सीटीएस चेक (पुरानी चेकबुक) को लेकर सख्त हो गई है। यह चेक सिक्योरिटी के लिहाज से ठीक नहीं हैं। इन पर नए सीटीएस चेक जैसा इनविजिबल कोड नहीं होता है, न ही इन पर संबंधित बैंक का नाम होता है। नए सीटीएस चेक में सिक्योरिटी फीचर्स आ रहे हैं। अगर कोई शख्स अपने बैंक में नान सीटीएस चेक देगा तो एक दिन में भुगतान हो जाएगा।
दूसरी बड़ी खबर ये कि डिजिटल ट्रांजक्शन को बढ़ावा देने के लिए सराकर अब चेकबुक को बंद करने जा रही है। हालांकि अधिकारी का कहना है कि अभी केवल इस तरह की सूचना है, लेकिन इस तरह की कोई आधिकारिक पत्र जारी नहीं हुआ है। लेकिन अगले साल यानी 2018 से इसे लागू किया जा सकता है। इसके बाद से बैंक केवल एटीएम, डेबिट और क्रेडिट कार्डों के माध्यम से ही डिजिटल लेन देन करेंगे।