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मोदी टीम-2 में पंजाब और हरियाणा से शामिल हुए छह दिग्गज, जानिए किसे मिला कौन-सा मंत्रालय
Fri, 31 May 2019 03:41 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 31 May 2019 03:41 PM IST
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PM Modi
- फोटो : PTI
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मोदी मंत्रिमंडल में पंजाब और हरियाणा दोनों को तिहरी खुशी मिली। दोनों राज्यों से तीन-तीन मंत्रियों को लिया गया और उनमें विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया। जानिए किसे कौन-सा विभाग मिला।
हरसिमरत कौर बादल
- फोटो : Facebook
हरसिमरत कौर बादल
52 वर्षीय हरसिमरत कौर बादल को मोदी टीम में केंद्रीय मंत्री बनाया गया है और इस बार भी उन्हें केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण विभाग मिला है। हरसिमरत ने बठिंडा जैसै टफ ट्रैक पर हैट्रिक लगाई। हरसिमरत बठिंडा लोकसभा सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर सांसद बनी हैं। वे 15वीं और 16वीं लोकसभा में भी सांसद रहीं। हरसिमरत कौर को दूसरी बार मोदी सरकार में मंत्री पद मिला है। इससे पहले मोदी सरकार में उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री का पद दिया गया था। जब शिअद के खिलाफ बेअदबी जैसे मुद्दे को लेकर कांग्रेस माहौल बनाने में जुटी थी, उन्होंने फिर जीत दर्ज की। हरसिमरत कौर बादल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बहू हैं। शिरोमणि अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल की पत्नी हैं। हरसिमरत ने राजनीति की शुरुआत साल 2009 में की।
52 वर्षीय हरसिमरत कौर बादल को मोदी टीम में केंद्रीय मंत्री बनाया गया है और इस बार भी उन्हें केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण विभाग मिला है। हरसिमरत ने बठिंडा जैसै टफ ट्रैक पर हैट्रिक लगाई। हरसिमरत बठिंडा लोकसभा सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर सांसद बनी हैं। वे 15वीं और 16वीं लोकसभा में भी सांसद रहीं। हरसिमरत कौर को दूसरी बार मोदी सरकार में मंत्री पद मिला है। इससे पहले मोदी सरकार में उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री का पद दिया गया था। जब शिअद के खिलाफ बेअदबी जैसे मुद्दे को लेकर कांग्रेस माहौल बनाने में जुटी थी, उन्होंने फिर जीत दर्ज की। हरसिमरत कौर बादल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बहू हैं। शिरोमणि अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल की पत्नी हैं। हरसिमरत ने राजनीति की शुरुआत साल 2009 में की।
हरदीप पुरी
- फोटो : amar ujala
हरदीप पुरी फिर मोदी की पसंद
1974 बैच के आईएफएस हरदीप पुरी एक बार फिर पीएम नरेंद्र मोदी की पसंद बने। मोदी-1 में भी वह केंद्रीय राज्यमंत्री थे और अभी फिर उन्हें मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुरी को इस बार राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। उन्हें हाउसिंग एंड अर्बन मंत्रालय, सिविल एविएशन मंत्रालय और कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्रालय सौंपा गया है। पुरी को विदेश नीति का माहिर माना जाता है। वह संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद निरोधी समिति के चेयरमैन और न्यूयॉर्क में अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान के उपाध्यक्ष रहे हैं। ब्रिटेन और ब्राजील में भारत के राजदूत रह चुके हैं। पुरी ने प्रचार के दौरान कहा था कि जलियांवाला बाग नरसंहार के समय उनके नाना यहां थे। किसी तरह उन्होंने अपनी जान बचाई थी। इसलिए वह अमृतसर के लिए बाहरी कैसे हो सकते हैं।
1974 बैच के आईएफएस हरदीप पुरी एक बार फिर पीएम नरेंद्र मोदी की पसंद बने। मोदी-1 में भी वह केंद्रीय राज्यमंत्री थे और अभी फिर उन्हें मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुरी को इस बार राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। उन्हें हाउसिंग एंड अर्बन मंत्रालय, सिविल एविएशन मंत्रालय और कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्रालय सौंपा गया है। पुरी को विदेश नीति का माहिर माना जाता है। वह संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद निरोधी समिति के चेयरमैन और न्यूयॉर्क में अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान के उपाध्यक्ष रहे हैं। ब्रिटेन और ब्राजील में भारत के राजदूत रह चुके हैं। पुरी ने प्रचार के दौरान कहा था कि जलियांवाला बाग नरसंहार के समय उनके नाना यहां थे। किसी तरह उन्होंने अपनी जान बचाई थी। इसलिए वह अमृतसर के लिए बाहरी कैसे हो सकते हैं।
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सांसद सोम प्रकाश
- फोटो : फाइल फोटो
सोम प्रकाश - रिसर्च अफसर से संसद तक
होशियारपुर के सांसद सोम प्रकाश को राज्यमंत्री बनाते हुए कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्रालय सौंपा गया है। उन्होंने अपना प्रोफेशनल करिअर 1972 में योजना बोर्ड में रिसर्च अफसर के तौर पर शुरू किया था। अप्रैल 1949 में जन्मे सोम प्रकाश ने पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए इकोनॉमिक्स में किया। रिसर्च अफसर के बाद एक्साइज टैक्सेशन अफसर बने। वह फरीदकोट, होशियारपुर, जालंधर के डीसी समेत कई अहम पदों पर रहे। 70 वर्षीय सोम प्रकाश रिटायर्ड आईएएस हैं, जिन्होंने भाजपा ज्वाइन करने को प्री मेच्योर रिटायरमेंट ले लिया था। हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव में वह होशियारपुर से जीत नहीं सके थे। 2012 और 2017 में वह लगातार भाजपा के टिकट पर फगवाड़ा से विधानसभा चुनाव जीते। पंजाब के मामलों की गहन जानकारी के साथ वह विधानसभा में लगातार मुद्दे उठाते रहे हैं।
होशियारपुर के सांसद सोम प्रकाश को राज्यमंत्री बनाते हुए कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्रालय सौंपा गया है। उन्होंने अपना प्रोफेशनल करिअर 1972 में योजना बोर्ड में रिसर्च अफसर के तौर पर शुरू किया था। अप्रैल 1949 में जन्मे सोम प्रकाश ने पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए इकोनॉमिक्स में किया। रिसर्च अफसर के बाद एक्साइज टैक्सेशन अफसर बने। वह फरीदकोट, होशियारपुर, जालंधर के डीसी समेत कई अहम पदों पर रहे। 70 वर्षीय सोम प्रकाश रिटायर्ड आईएएस हैं, जिन्होंने भाजपा ज्वाइन करने को प्री मेच्योर रिटायरमेंट ले लिया था। हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव में वह होशियारपुर से जीत नहीं सके थे। 2012 और 2017 में वह लगातार भाजपा के टिकट पर फगवाड़ा से विधानसभा चुनाव जीते। पंजाब के मामलों की गहन जानकारी के साथ वह विधानसभा में लगातार मुद्दे उठाते रहे हैं।
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रतनलाल कटारिया
- फोटो : फाइल फोटो
रतनलाल कटारिया- पसंद नहीं अनिल विज का नाम
अंबाला से सांसद 67 वर्षीय रतन लाल कटारिया को राज्यमंत्री बनाते हुए जलशक्ति मंत्रालय और सामाजिक न्याय व सशक्तिकरण मंत्रालय सौंपा गया है। रतनलाल तीसरी बार सांसद बने हैं। वे 1999 में अंबाला से पहली बार सांसद चुने गए। उन्होंने 2014 में पूर्व सांसद कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी वाल्मीकि को हराया था। रतन लाल संगठन में अनेक पदों पर रह चुके हैं। वे प्रदेश सरकार में भी राज्य मंत्री रहे हैं। आमतौर पर एक दूसरे का नाम न पसंद करने वाले अंबाला के रतनलाल कटारिया और अनिल विज इस चुनाव में गले मिल चुके हैं। अब कटारिया केंद्र में मंत्री हैं और अनिल विज राज्य सरकार में मंत्री हैं। दोनों में कितना सामंजस्य बैठेगा यह देखना होगा, क्योंकि विज अपनी बेबाकी के लिए मशहूर हैं।
अंबाला से सांसद 67 वर्षीय रतन लाल कटारिया को राज्यमंत्री बनाते हुए जलशक्ति मंत्रालय और सामाजिक न्याय व सशक्तिकरण मंत्रालय सौंपा गया है। रतनलाल तीसरी बार सांसद बने हैं। वे 1999 में अंबाला से पहली बार सांसद चुने गए। उन्होंने 2014 में पूर्व सांसद कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी वाल्मीकि को हराया था। रतन लाल संगठन में अनेक पदों पर रह चुके हैं। वे प्रदेश सरकार में भी राज्य मंत्री रहे हैं। आमतौर पर एक दूसरे का नाम न पसंद करने वाले अंबाला के रतनलाल कटारिया और अनिल विज इस चुनाव में गले मिल चुके हैं। अब कटारिया केंद्र में मंत्री हैं और अनिल विज राज्य सरकार में मंत्री हैं। दोनों में कितना सामंजस्य बैठेगा यह देखना होगा, क्योंकि विज अपनी बेबाकी के लिए मशहूर हैं।