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बेटी के सपने के लिए बाप ने गिरवी रख दी जमीन, एवरेस्ट में तिरंगा फहरा 'लाडली' ने नाम किया रोशन

Thu, 30 May 2019 02:08 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Thu, 30 May 2019 02:08 AM IST
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Farmer's daughter wins Mount Everest
 विकास राणा - फोटो : अमर उजाला

साधारण किसान परिवार में जन्मी विकास राणा के हौसले के आगे विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट भी छोटी पड़ गई है। विकास के परिवार की कमजोर आर्थिक हालात भी माउंट एवरेस्ट को फतेह करने में बाधक नहीं बनी। विकास राणा के हौसले को देखते हुए परिवार व समाज ने आर्थिक बाधा को खुद हटाने का काम किया। एवरेस्ट फतेह करने में 30 लाख रुपये के खर्च को वहन करने की क्षमता परिवार में नहीं थी।विकास जींद जिले के सुदकैन खुर्द गांव की रहने वाली हैं।

Farmer's daughter wins Mount Everest
 विकास राणा - फोटो : अमर उजाला

मगर विकास राणा की जिद थी कि वह इसे जरूर फतेह करेगी। राणा के इस हौसले को देखकर पिता ओम प्रकाश ने ढाई एकड़ में से सवा एकड़ जमीन गिरवी रखकर कुछ पैसों का इंतजाम किया। बाकी के 15 लाख रुपये राजपूत समाज ने एकत्रित कर दिए। इस प्रकार विकास राणा का माउंट एवरेस्ट फतेह करने का सपना साकार हो गया। विकास राणा के अनुसार अब तक साउथ अफ्रीका की किलिमंजारो और रूस की माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर तिरंगा फहराया है।

Farmer's daughter wins Mount Everest
 विकास राणा - फोटो : अमर उजाला

विकास की इन्हीं उपलब्धियों को देखते हुए परिवार व समाज ने भी विकास पर भरोसा जताया और इस चोटी को फतेह करने के लिए हरसंभव सहायता देकर आगे बढ़ाने का काम किया। अपने इन हौसलों के बदौलत विकास राणा हरियाणा की एकमात्र स्कीइंग की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी व पर्वतारोही भी है। अब उन्होंने माउंट एवरेस्ट अभियान में न केवल सफलता पूर्वक तिरंगा फहराकर आई बल्कि पूरी दुनिया में यह साबित कर दिया की बेटियां किसी भी ऊंचाई को छूने में सक्षम है। विकास राणा की माता गृहिणी हैं। 

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 विकास राणा - फोटो : अमर उजाला

विकास राणा के पिता ओमप्रकाश ने बताया उन्हें बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व है। शुरू से ही उन्होंने विकास राणा को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। हालांकि इसके लिए समाज के लोगों का विरोध का सामना भी करना पड़ा लेकिन किसी भी बात की परवाह किए बिना बेटी के सपनों को उड़ान दी।विकास राणा ने 2011 में जम्मू कश्मीर के जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग विंटर स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में कोर्स करके पर्वतारोहण की शुरुआत की।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

इसके साथ-साथ राणा ने स्कीइंग में भी देश और प्रदेश में अपना नाम चमकाया। पांच बार नेशनल गेम में भाग लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने नेशनल गेम में सिल्वर मेडल जीता था। 2017 में जापान में हुए एशियन गेम में भाग लेकर भारत को रिप्रजेंट किया था। विकास राणा ने पांच अप्रैल को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई का अभियान शुरू किया और वहां तिरंगा फहराया। एवरेस्ट फतेह करने के बाद विकास राणा को स्वास्थ्य संबंधित कुछ दिक्कत चल रही हैं। वे काठमांडू में स्वास्थ्यलाभ ले रही हैं। जून महीने में वे अपने घर लौटेंगी।

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