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पिता आर्मी में...खुद टीचर और शौक 'लता' बनने का

Mon, 20 Apr 2015 07:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली Updated Mon, 20 Apr 2015 07:41 AM IST
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पिता आर्मी में...खुद टीचर और शौक 'लता' बनने का

motivational story of char shahibzaade movie singer tript kaur sandhu

एक बेटी, जिसके पिता आर्मी में थे। वह खुद एक म्यूजिक टीचर है और 'लता मंगेशकर' की तरह बनने का सपना देखती हैं। ये हैं गायिका तृप्त कौर संधू, जिन्होंने अपनी गायकी से अलग पहचान बनाई।


पिता आर्मी में...खुद टीचर और शौक 'लता' बनने का

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चार साहिबजादे फिल्म में घोड़ी गाकर सुर्खियों में आईं तृप्त कौर संधू की राह आसान नहीं थी। लंबा संघर्ष और फिर एक घोड़ी से चढ़ ली सफलता की पौड़ी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया, मगर कभी हिम्मत नहीं हारी। हर मुश्किल से उन्होंने एक नई सीख ली।

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मिडल क्लास फैमिली में जन्मीं तृप्त कौर के पिता आर्मी में थे। वे तीन बहनें और एक भाई हैं। ऐसे में घर का खर्च काफी मुश्किल से चलता था। तृप्त ने एक ही सपना देखा, अच्छी गायिका बनने का। तृप्त कौर संधू ने इसकी शुरूआत गुरुद्वारा साहिब में शबद गायन से की। घरवाले भी सहयोग करते थे। जब उनकी उच्च शिक्षा शुरू हुई तो उन्होंने खुद ट्यूशन पढ़ानी शुरू कर दी, ताकि घरवालों पर उनकी पढ़ाई का बोझ न पड़े।

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एमए म्यूजिक करने के बाद तृप्त कौर संधू ने म्यूजिक लाइन में कैरियर बनाने के लिए स्ट्रगल किया। कई पंजाबी फिल्मों में उन्होंने आवाज दी, लेकिन चार साहिबजादे फिल्म में उनकी गाई घोड़ी को काफी तारीफ मिली। अब उनके पास ऑफरों की भरमार है।

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तृप्त कौर फेज-6 स्थित शिवालिक पब्लिक स्कूल में म्यूजिक की टीचर हैं। वह रोजाना बच्चों को म्यूजिक की बारीकियां सिखाती हैं। वह कहती हैं कि वे बच्चों को एक ही शिक्षा देती हैं कि जीवन में कभी हार मत मानो, जो सपना देखा है उसे हकीकत में बदलो।

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