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149 वर्षों बाद बना बेहद शुभ संयोग, तो चंद्रग्रहण के समय इस विधि से करें पूजन, इच्छित फल मिलेगा
Tue, 16 Jul 2019 10:34 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 16 Jul 2019 10:34 AM IST
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ज्योतिषियों का कहना है कि 149 साल बाद चंद्रग्रहण पर बेहद खास संयोग बन रहा है। ऐसे में अगर लोग इस खास तरीके से पूजन करेंगे तो शुभ फल की प्राप्ति होगी।
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शताब्दी का सबसे लंबा दिखने वाला चंद्रग्रहण 16 जुलाई दिन मंगलवार (संक्रांति) को लग रहा है। हिंदी पंचांग के मुताबिक, मंगलवार रात 1.31 बजे चंद्रग्रहण शुरू होगा और बुधवार सुबह 4.30 बजे तक रहेगा। ऐसे में ग्रहण करीब तीन घंटे तक रहेगा। यह संयोग सौ वर्ष के बाद आ रहा है कि जिस समय चंद्रग्रहण होगा, उस वक्त पूरे भारत में चंद्रोदय हो चुका होगा। भारत के सभी शहरों में 16 जुलाई को शाम छह बजे से सात बजकर 45 मिनट तक चंद्रमा का उदय हो जाएगा।
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149 वर्षों के बाद गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण
16/17 जुलाई की रात को गुरु पूर्णिमा है और खंडग्रास चंद्रग्रहण भी लगेगा। ऐसा संयोग 149 साल बाद आ रहा है। देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर 28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि 149 साल पहले 12 जुलाई 1870 को गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण लगा था। इस बार चंद्रग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक मंगलवार शाम चार बजकर 31 मिनट पर शुरू हो जाएगा। ऐसे में शाम को ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
16/17 जुलाई की रात को गुरु पूर्णिमा है और खंडग्रास चंद्रग्रहण भी लगेगा। ऐसा संयोग 149 साल बाद आ रहा है। देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर 28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि 149 साल पहले 12 जुलाई 1870 को गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण लगा था। इस बार चंद्रग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक मंगलवार शाम चार बजकर 31 मिनट पर शुरू हो जाएगा। ऐसे में शाम को ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
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मंत्र साधना और सिद्धि करना विशेष फल देगा
भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि ग्रहण के दौरान मंत्र साधना और सिद्धि करना विशेष फल देगा। ग्रहण के दौरान भोजन बनाना और करना दोनों ही निषेध हैं। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। सिलाई या कटाई की भी मनाही है। जरूरी हुआ तो गर्भवती महिलाएं नारियल लेकर घर से निकलें और बाद में उस नारियल को जल में प्रवाहित कर दें।
भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि ग्रहण के दौरान मंत्र साधना और सिद्धि करना विशेष फल देगा। ग्रहण के दौरान भोजन बनाना और करना दोनों ही निषेध हैं। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। सिलाई या कटाई की भी मनाही है। जरूरी हुआ तो गर्भवती महिलाएं नारियल लेकर घर से निकलें और बाद में उस नारियल को जल में प्रवाहित कर दें।
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घर की शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। ग्रहण के बाद स्नान करने के बाद भगवान की मूर्तियों को भी स्नान करवाकर पूजा करनी चाहिए। गर्भवती महिलाएं सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करें। चंद्रग्रहण एक अशुभ घटना है और इसकी छाया से बचने के लिए लोग ग्रहण के बाद स्नान-दान करते हैं। इस दौरान चांद देखने की भी मनाही होती है। खासतौर पर कुंवारी कन्याओं, गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और बुजुर्गों को ग्रहण के चांद से दूर रहने की सलाह दी जाती है।