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क्या आपको भी भूलने की बीमारी है, तो अब नहीं जाएगी याददाश्त, मिल गया है इलाज यहां जानिए

Thu, 04 Apr 2019 11:06 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 04 Apr 2019 11:06 AM IST
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Medical Research, Scientists Found Out Alzheimer treatment
सांकेतिक तस्वीर
अगर आपको भी भूलने की बीमारी है, तो अब ऐसा नहीं होगा। न ही याददाश्त जाएगी और न ही कुछ भूलेंगे, क्योंकि इसका इलाज मिल गया है, जो कारगर साबित होगा।
Medical Research, Scientists Found Out Alzheimer treatment
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दुनिया भर में 4.40 करोड़ लोग अल्जाइमर के शिकार हैं। उनकी याददाश्त कम हो गई है या फिर बिलकुल जा चुकी है। भविष्य में ऐसे रोगियों की संख्या नहीं बढ़े, इसके लिए पंजाब विश्वविद्यालय, पीजीआई चंडीगढ़ व एम्स जोधपुर के पांच वैज्ञानिकों ने मिलकर एक बड़ा शोध किया है। पांच माह चली इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने उन जीन का पता लगाया है, जिनके कारण अल्जाइमर की बीमारी होती है। शरीर में पाए जाने वाले 22 हजार जीन में से उन तीन जीन को खोजा गया है, जिनकी जांच के जरिये यह पता लग जाएगा कि शरीर में कौन से मेटल्स की अधिकता व कमी के कारण यह रोग हुआ है। पहले कारणों का पता लगने पर डॉक्टर आसानी से बीमारी का इलाज कर सकेंगे।
Medical Research, Scientists Found Out Alzheimer treatment
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिस्टम बायोलॉजी एंड बायोइन्फोर्मेटिक्स के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार ने अल्जाइमर पर नवंबर 2018 से काम शुरू किया। उन्होंने पता लगाया कि शरीर में पाए जाने वाले जीन के मस्तिष्क में असंतुलित हो जाने के कारण अल्जाइमर होता है। यह जीन शरीर में कॉपर, जिंक, आयरन आदि मेटल्स की अधिकता या कमी के कारण असंतुलित हो जाते हैं। सबसे पहले डॉ. अशोक ने ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर साइटोस्केप के जरिये जीन टू जीन नेटवर्क की स्टडी की। शरीर के 22 हजार जीन पर स्टडी धीरे-धीरे चलती रही। तीन माह में रिसर्च पर 80 फीसदी काम पूरा हो गया। अब रिजल्ट सामने हैं।
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Medical Research, Scientists Found Out Alzheimer treatment
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तीन जीन मिले हैं। ऑस्टिवन, कोगलेशन फैक्टर पांच व सात जीन कॉपर व आयरन के शरीर में अधिकता होने के कारण असंतुलित होने लगते हैं। एबीआईए जीन आयरन की मात्रा की वजह से प्रभावित होता है। इसी के कारण अल्जाइमर जन्म लेता है। अब जैसे ही किसी मरीज में अल्जाइमर के लक्षण दिखाई देंगे, डॉक्टर इन तीन जीन की जांच कराकर आसानी से बीमारी का इलाज कर सकेंगे। कॉपर, आयरन, जिंक आदि को शरीर में चिकित्सक कम या अधिक कर सकेंगे। इस रिसर्च में एम्स जोधपुर के प्रो. प्रवीण शर्मा, डॉ. अमित पॉल, पीजीआई चंडीगढ़ से सेवानिवृत्त प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद व पीयू की रिसर्च स्कॉलर शीतल गुप्ता का बड़ा योगदान रहा।
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दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है अल्जाइमर
शरीर को मेटल्स की आवश्यकता बहुत कम होती है। लेकिन यदि शरीर में इसकी मात्रा अधिक हो जाती है या फिर कम हो जाती है तो लोग अल्जाइमर की चपेट में आने लगते हैं। अल्जाइमर दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है। पहले लोग समझते हैं कि उम्र बढ़ने के कारण ऐसा हो रहा है, लेकिन असल में वे अल्जाइमर की चपेट में आ चुके होते हैं। इसका पता आठ से दस साल बाद लगता है। मालूम हो कि 0.00034 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम शरीर को मेटल्स की आवश्यकता होती है। यह मेटल्स शरीर में पानी, सब्जी या अन्य आहार के जरिये मिलते हैं।
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