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अमर उजाला संवाद में संगीत के पुरोधाओं ने कहा, म्यूजिक के बाजार में अब बेसुरे भी सुर वाले हो गए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 14 Jul 2018 09:42 AM IST
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म्यूजिक के बाजार में अब डिमांड और सप्लाई का ऐसा दौर चला है कि बेसुरे भी सुर वाले हो गए और सुर वालों को कोई पूछ नहीं रहा। संगीत का यह है नया दौर। आधुनिकता का यह दौर है ही ऐसा। म्यूजिक स्टूडियो के आधुनिकीकरण के साथ ही तबला, सितार जैसे वाद्य यंत्र अब आधुनिक रूप ले चुके हैं और साफ्टवेयर की दुनिया ने ‘कट पेस्ट’ संगीत को जन्म दे दिया है। ऐसे में गायकों की बहार तो है पर सुरों का बाजार मंदा हो चला है।
सिंगर आलाप
अब तो डिमांड और सप्लाई का दौर है
मैं अपने माता-पिता की वजह से यहां हूं। कनाडा स्टडी करने गया था, इंजीनियर बनने का ख्वाब था। ऐसे में आडियो इंजीनियरिंग की। कुछ बड़े नामों के साथ काम किया। पिता सरदूल सिकंदर से गायन की कला तो सीखी ही थी। जब आडियो इंजीनियरिंग की तो उसके बाद लगा कि कुछ नया करना चाहिए। मैंने देखा कि देश का बीट पैटर्न ढोलक है, इसे मैंने नौलखी ढोलक का नाम दिया है। वास्तव में म्यूजिक इंडस्ट्री अब एकदम बदल चुकी है।
मुझको ऐसा लगा कि मेरे बुजुर्गों ने इसकी सेवा की तो मुझको भी लगना चाहिए। हमारे पास ऐसे भी सिंगर हैं जो मेहनत करके काम करते हैं। डिमांड और सप्लाई की बात करें तो वास्तव में मैंने देखा है जमाना ही यही रह गया है। कई ऐसे गायक हैं जो गर्दिश में हैं। उनकी गायकी का क्या कहना, लेकिन उनको सुनने वाले नहीं हैं। वास्तव में यदि पुराने गीतों पर जाएं तो बात वहीं आ जाती है कि एक-एक गाने को इतना बेहतरीन गाया जाता था कि वह कर्णप्रिय हो जाता था। अब ऐसी बात नहीं रही। - आलाप (सिंगर)
मैं अपने माता-पिता की वजह से यहां हूं। कनाडा स्टडी करने गया था, इंजीनियर बनने का ख्वाब था। ऐसे में आडियो इंजीनियरिंग की। कुछ बड़े नामों के साथ काम किया। पिता सरदूल सिकंदर से गायन की कला तो सीखी ही थी। जब आडियो इंजीनियरिंग की तो उसके बाद लगा कि कुछ नया करना चाहिए। मैंने देखा कि देश का बीट पैटर्न ढोलक है, इसे मैंने नौलखी ढोलक का नाम दिया है। वास्तव में म्यूजिक इंडस्ट्री अब एकदम बदल चुकी है।
मुझको ऐसा लगा कि मेरे बुजुर्गों ने इसकी सेवा की तो मुझको भी लगना चाहिए। हमारे पास ऐसे भी सिंगर हैं जो मेहनत करके काम करते हैं। डिमांड और सप्लाई की बात करें तो वास्तव में मैंने देखा है जमाना ही यही रह गया है। कई ऐसे गायक हैं जो गर्दिश में हैं। उनकी गायकी का क्या कहना, लेकिन उनको सुनने वाले नहीं हैं। वास्तव में यदि पुराने गीतों पर जाएं तो बात वहीं आ जाती है कि एक-एक गाने को इतना बेहतरीन गाया जाता था कि वह कर्णप्रिय हो जाता था। अब ऐसी बात नहीं रही। - आलाप (सिंगर)
एक्ट्रेस प्रीती साहनी
एक दिन में सौ गाने, कैसे बनेंगे अच्छे तराने
मैं तो कहूंगी कि पंजाबी गानों में वल्गरटी नहीं है हां, वायलेंस है। पंजाब में म्यूजिक भी है और सुर भी हैं, लेकिन अब इंडस्ट्री बदल चुकी है। अब सिंगल ट्रैक का जमाना है। यू ट्यूब का जमाना है। कोई भी ट्रैक गाया और उठाकर डाल दिया सोशल मीडिया में। पंजाब के कई बड़े नामचीन गायक अभी भी लाइव शो में लाखों की भीड़ इकट्ठी कर लेते हैं पर उनको कोई म्यूजिक इंडस्ट्री मौका नहीं देती। कारण है डिमांड।
आडियंस की चाहत बदल चुकी है या फिर कहें कि इतना ज्यादा फ्यूजन परोस दिया गया है कि आडियंस की आदत एकदम चेंज हो चुकी है। पहले लोग आर्टिस्टों का इंतजार करते थे और अब ऐसा नहीं रह गया है। एक दिन में सौ गाने रिलीज हो रहे हैं, उसमें रैप से लेकर हरेक प्रकार के म्यूजिक होता है। ऐसा भी नहीं रह गया है कि कोई गायक स्टाइल नहीं चेंज कर सकता है। इतिहास को देखें तो जो अपना दौर लेकर आया वह लीजेंड ही बना है। आप खुद देख लें छल्ला सभी ने गाया लेकिन जब गुरदास मान ने गाया तो उनका ही बन गया। - प्रीतो साहनी (एक्ट्रेस और गायिका)
मैं तो कहूंगी कि पंजाबी गानों में वल्गरटी नहीं है हां, वायलेंस है। पंजाब में म्यूजिक भी है और सुर भी हैं, लेकिन अब इंडस्ट्री बदल चुकी है। अब सिंगल ट्रैक का जमाना है। यू ट्यूब का जमाना है। कोई भी ट्रैक गाया और उठाकर डाल दिया सोशल मीडिया में। पंजाब के कई बड़े नामचीन गायक अभी भी लाइव शो में लाखों की भीड़ इकट्ठी कर लेते हैं पर उनको कोई म्यूजिक इंडस्ट्री मौका नहीं देती। कारण है डिमांड।
आडियंस की चाहत बदल चुकी है या फिर कहें कि इतना ज्यादा फ्यूजन परोस दिया गया है कि आडियंस की आदत एकदम चेंज हो चुकी है। पहले लोग आर्टिस्टों का इंतजार करते थे और अब ऐसा नहीं रह गया है। एक दिन में सौ गाने रिलीज हो रहे हैं, उसमें रैप से लेकर हरेक प्रकार के म्यूजिक होता है। ऐसा भी नहीं रह गया है कि कोई गायक स्टाइल नहीं चेंज कर सकता है। इतिहास को देखें तो जो अपना दौर लेकर आया वह लीजेंड ही बना है। आप खुद देख लें छल्ला सभी ने गाया लेकिन जब गुरदास मान ने गाया तो उनका ही बन गया। - प्रीतो साहनी (एक्ट्रेस और गायिका)
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पिंकी संधू
फ्यूजन से आया गायकी में एकदम चेंज
मैं सपना चौधरी को जानती हूं। वे गायिका नहीं बल्कि एक परफार्मर हैं। उनके काफी फालोअर हैं, लोगों को उनकी परफारमेंस पसंद आती है। उन्होंने अपना एक मंच बना लिया है कोई भी बना सकता है। वास्तव में आडियंस की बात है। आडियंस को क्या पसंद आएगा यह आप तय नहीं कर सकते हैं। मुझको लगता है कि पंजाब में भी परफार्मर हैं और गायक भी हैं, लेकिन आडियंस तो जुटानी होगी।
एक अच्छा संगीत लाने के लिए जरूरी है कि थोड़ा समझा जाए। मसलन, मैं अगर नहीं गा सकती हूं और अच्छी एक्टिंग कर सकती हूं तो मैं एक्टिंग करूंगी न कि सिंगिंग। पंजाब में फ्यूजन बढ़ा है और फ्यूजन के बढ़ने से पारंपरिक गायकों को वैल्यू में अंतर आया है। - पिंकी संधू (पिंकी मोगे वाली)
मैं सपना चौधरी को जानती हूं। वे गायिका नहीं बल्कि एक परफार्मर हैं। उनके काफी फालोअर हैं, लोगों को उनकी परफारमेंस पसंद आती है। उन्होंने अपना एक मंच बना लिया है कोई भी बना सकता है। वास्तव में आडियंस की बात है। आडियंस को क्या पसंद आएगा यह आप तय नहीं कर सकते हैं। मुझको लगता है कि पंजाब में भी परफार्मर हैं और गायक भी हैं, लेकिन आडियंस तो जुटानी होगी।
एक अच्छा संगीत लाने के लिए जरूरी है कि थोड़ा समझा जाए। मसलन, मैं अगर नहीं गा सकती हूं और अच्छी एक्टिंग कर सकती हूं तो मैं एक्टिंग करूंगी न कि सिंगिंग। पंजाब में फ्यूजन बढ़ा है और फ्यूजन के बढ़ने से पारंपरिक गायकों को वैल्यू में अंतर आया है। - पिंकी संधू (पिंकी मोगे वाली)
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अली ब्रदर्स
जो पसीने से नहाते हैं इतिहास बदलते हैं
हमारा पटियाला घराना है। हम यू ट्यूब पर अकसर गाने सुनते हैं तो अच्छा नहीं लगता है। म्यूजिक कुछ है और गाने कुछ हैं। समझ में नहीं आता हो क्या रहा है। कई बार कोफ्त यह होती है कि हमारी मेहनत कहां गई। हमने ही नहीं, कई ऐसे गायकों ने जिन्होंने वर्षों तपस्या करके संगीत का प्रशिक्षण लिया और हमसे ज्यादा व्यूज कई के हैं। एक आर्टिस्ट को मैं सुन रहा था, अकरम फरीदी, क्या गाते हैं। उनका गायन हम लगातार सुनते रहे।
पाकिस्तान में उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता है, पर यू ट्यूब में उनके व्यूज हैं 504। उनका क्या आरोह अवरोह है, कोई उनका मुकाबला नहीं कर सकता है। कोई मेहनत ही नहीं करना चाहता है। वास्तव में चेंज आ चुका है, सुर का कार्ड गायब हो चुका है। फिर भी मैं कहना चाहूंगा जो पानी से नहाते हैं वह लिबास बदलते हैं जो पसीने से नहाते हैं वह इतिहास बदलते हैं। - अली ब्रदर्स (शाहरुख अली खान, परवेज बबलू, परवेज हसन)
हमारा पटियाला घराना है। हम यू ट्यूब पर अकसर गाने सुनते हैं तो अच्छा नहीं लगता है। म्यूजिक कुछ है और गाने कुछ हैं। समझ में नहीं आता हो क्या रहा है। कई बार कोफ्त यह होती है कि हमारी मेहनत कहां गई। हमने ही नहीं, कई ऐसे गायकों ने जिन्होंने वर्षों तपस्या करके संगीत का प्रशिक्षण लिया और हमसे ज्यादा व्यूज कई के हैं। एक आर्टिस्ट को मैं सुन रहा था, अकरम फरीदी, क्या गाते हैं। उनका गायन हम लगातार सुनते रहे।
पाकिस्तान में उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता है, पर यू ट्यूब में उनके व्यूज हैं 504। उनका क्या आरोह अवरोह है, कोई उनका मुकाबला नहीं कर सकता है। कोई मेहनत ही नहीं करना चाहता है। वास्तव में चेंज आ चुका है, सुर का कार्ड गायब हो चुका है। फिर भी मैं कहना चाहूंगा जो पानी से नहाते हैं वह लिबास बदलते हैं जो पसीने से नहाते हैं वह इतिहास बदलते हैं। - अली ब्रदर्स (शाहरुख अली खान, परवेज बबलू, परवेज हसन)