सरकार रकम देने को तैयार हो गई, तो किसान से ट्रेन और स्टेशन का मालिकाना हक खत्म हो जाएगा, जानिए क्या है मामला
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रेलवे ने अदालत में 74 लाख रुपये जमा कराए
सरकारी कामकाज में आम आदमी की सुनवाई की बात तो छोड़िए जनाब, कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं किया जाता है। यही कारण है कि सिस्टम को पटरी पर लाने के लिए कोर्ट को भी अक्सर चाबुक चलाना पड़ता है। ऐसा ही कुछ मामला लुधियाना में देखने को मिला है, जहां कोर्ट ने अपने एक आदेश में एक किसान को रेलवे स्टेशन और एक ट्रेन का सीधा मालिक बना दिया था। दरअसल, रेलवे ने 10 साल पहले एक किसान की जमीन अवाप्त की थी और उसे पूरा मुआवजा देने में हीलाहवाली कर रही थी।
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रेलवे ने अदालत में 74 लाख रुपये जमा कराए
रेलवे लुधियाना मण्डल ने दस साल पहले लुधियाना-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के लिए किसान सम्पूर्ण सिंह की जमीन अवाप्त की थी। कोर्ट ने किसान की जमीन का मुआवजा एक एकड़ 25 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख प्रति एकड़ कर दिया था। इस हिसाब से किसान का मुआवजा 1.47 करोड़ रुपए बना, लेकिन रेलवे ने मात्र 47 लाख ही दिए। शेष एक करोड़ रुपए की राशि नहीं दी।
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रेलवे ने अदालत में 74 लाख रुपये जमा कराए
इस पर किसान ने कोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने मुआवजा देने के आदेश दिए, लेकिन फिर भी रेलवे ने मुआवजा नहीं दिया। इस पर कोर्ट ने अब किसान की याचिका पर अदालती आदेश के पालन के लिए सम्पूर्ण सिंह को लुधियान स्टेशन और स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन का तकनीकी तौर पर मालिकाना हक देने के आदेश दिए।
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रेलवे ने अदालत में 74 लाख रुपये जमा कराए
इस आदेश के बाद अब रेलवे की नींद टूटी है। लुधियाना चंडीगढ़ रेल लाइन के लिए अधिग्रहित जमीन के एवज में रेलवे ने अदालत में 73 लाख 90 हजार 036 रुपये जमा करा दिए हैं। रकम जमा कराने के बाद रेलवे ने केस के साथ अटैच की गई स्वर्ण शताब्दी ट्रेन और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के कमरे को छोड़ने का आवेदन किया और पूरे मामले में अपना पक्ष भी रखा।