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हरियाणा की सियासत, दांव में कई विरासत, नतीजों पर सबकी नजर, क्या मुश्किल होगी दिग्गजों की डगर

Mon, 13 May 2019 12:38 AM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 13 May 2019 12:38 AM IST
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Lok sabha elections 2019, Everybody's eye on Lok Sabha results in Haryana
लोकसभा चुनाव 2019

हरियाणा में लोकसभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। अब नजर नतीजों पर हैं, क्योंकि यही चुनावी परिणाम ये तय करेंगे कि भविष्य में किस दिग्गज और दल की राह पथरीली होने वाली है और कौन मजबूती से उभर सामने आएगा। इस बार हालांकि सूबे में वोटिंग 60 फीसद से अधिक हुई है, मगर आंकड़ा वर्ष 2014 के वोटिंग प्रतिशत को नहीं छू पाया है। लेकिन इस चुनाव का रुझान किस पार्टी के पक्ष में जीत का माहौल बनाएगा, इसका फैसला 23 मई को हो जाएगा।

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मनोहर लाल (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

हरियाणा में इस बार लोकसभा चुनाव की सजी सियासी बिसात पर सभी राजनीतिक दलों ने मोहरे भी मजबूती से उतारे और चालें भी पूरी कूटनीतिक ढंग से चली थी। लेकिन यह तय है कि शह और मात के इस खेल में हारने वाले दिग्गजों की न केवल डगर मुश्किल होने वाली है, बल्कि उनके सामने कई तरह की नई चुनौतियां भी मुखर होंगी, क्योंकि ठीक चार माह बाद सूबे में विधानसभा चुनाव की बिसात सजने वाली है। इस बार हुए लोकसभा चुनाव में सीएम मनोहर लाल समेत हुड्डा पिता-पुत्र, पूर्व सीएम बंसीलाल, भजनलाल और देवीलाल व राव परिवार के वंशजों के प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

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दीपेंद्र हुड्डा - फोटो : फाइल फोटो

विधानसभा चुनाव से पहले सीएम मनोहर लाल को लोकसभा की इस पारी को फतेह कर भाजपा हाईकमान को सूबे में ‘टीम मनोहर’ के जलवे का अहसास करवाना होगा। ऐसा हुआ तो न केवल टीम मनोहर का कद केंद्रीय नेतृत्व के सामने और ऊंचा होगा, बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले उनकी टीम भी उत्साह से पूरी तरह लबरेज रहेगी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का परचम थामने वाले पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा के लिए फिर से जीत जरूरी होगी।

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श्रुति चौधरी - फोटो : फाइल फोटो

हुड्डा-पिता पुत्र जीतते हैं, तो बिखराव में बंटी इस कांग्रेस में हाईकमान के सामने न केवल पूर्व सीएम हुड्डा का कद और ऊंचा होगा, बल्कि उनके बेटे दीपेंद्र भी ज्यादा मजबूत होंगे, क्योंकि इस बार भाजपा ने लोकसभा चुनाव में हुड्डा पिता-पुत्र को पटकनी देने के लिए कड़ी घेराबंदी की थी। 

पूर्व सीएम बंसीलाल की पुत्रवधू और सीएलपी लीडर किरण चौधरी की चौधर भी बेटी श्रुति की जीत से ही जुड़ी है। बेटी जीती तो मां किरण की चौधर और बढ़ेगी और विधानसभा में कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष की उनकी दावेदारी को और बल मिलेगा। आचार संहिता के बाद हरियाणा विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष का चयन होना है। साथ ही पिछला चुनाव हारी उनकी बेटी श्रुति के लिए भी इस बार जीत आगे की राह आसान करेगी।

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लोकसभा चुनाव 2019

पूर्व उप प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल की विरासत तो लोकसभा चुनाव से पहले ही बिखर चुकी थी। इस चुनाव में देवीलाल के दोनों पोते अभय चौटाला और अजय चौटाला ने अलग-अलग राह चलते हुए इनेलो और जननायक जनता पार्टी (जजपा) के बैनर तले सभी सीटों पर यह चुनाव लड़ा है। जाहिर है दोनों ही दलों का भविष्य चुनावी नतीजे पर टिका है।

इनेलो के खाते में कोई सीट आई तो इस दल को संजीवनी मिल जाएगी। उधर, जजपा का चुनाव में खाता खुला तो इस पार्टी के लिए अच्छी सियासी शुरूआत होगी। पूर्व सीएम राव वीरेंद्र के बेटे सांसद राव इंद्रजीत भी इस बार फिर मैदान में हैं, मुकाबला कड़ा था, जीते तो अहीरवाल में उनकी धाक और बढे़गी।

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